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Friday, 1 July 2011

लो भाई आज की दारुशाला अर दीवाने की दीवानगी देखो १

थम मेरी चिता प दारू खिंडाइओ घी ना कति बर्बाद करियो
मन्ने सिर्फ पियक्कड़ कंधा देवे, मेरे बाद यो वचन याद करियो
घर वाले गर श्राद करे, तो सब श्राद मेरा न्यू करियो
गाम के सारे पीवनिया क घर न बोतल जा धरियो

पुजारी भूल ज्या मंदिर जाना, भगत भूल ज्या धुप जलाना
मस्जिद में भी किसे कारण नमाज़ पढ़ी जा धिंगताना
पर कदे शराबी ठेके की सैर करना ना भूले
बेशक उसके घर न कोए,.उस दिन फांसी पे झूले

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