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Monday, 25 July 2011

मरके विरासत में के देके जाओगे

नौजवानों सोच लो थम अपने टाबरा न
मरके विरासत में के देके जाओगे
झूठ चोरी जारी और फरेब की चासनी में
कौन से संस्कार भे के जाओगे
दे रहे हो जिस तरह  धोखा माँ बाप को
खुद संग यही क्या इतिहास दोहराओगे
वक्त है अभी भी सम्भल जाओ दोस्तों
वरना पीढियों का जुगाड़ क्र जाओगे

साँझ ढलते ही ख्वाब आने नहीं

अंगूर की बेटी के जो दीवाने नहीं
वो लोग महफ़िल में बुलाने नहीं
कल टूटते है तो आज ही टूट जाएँ
दोस्तों हमें झूठे रिश्ते निभाने नहीं
बिना पानी के जाम पीना पड़ेगा
यहाँ पर चलेंगे कोई बहाने नहीं
आने है जिसके आधी रात आयेगे
साँझ ढलते ही ख्वाब आने नहीं
अभी कल की ही तो बात है दोस्त
जख्म महोब्बत के पुराने नहीं
कोई तो बताये बेचैन जिसके
नसीब में इश्क के फसाने नहीं