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Wednesday, 6 July 2011

लो मेरे यारो दिलदारो गुज़रे जमाने के किस्से आप सब के हिस्से मुलाकात कर ले.......



गाँधी आल्ले नोटा त यारी स मुलाकात कर ले
मेरी आज तो जेब भारी स मुलाकात कर ले
इडली, डोसे, गर्म समोसे, बेशक ठंडे पी लिए
लूटन-पीटन की तैयारी स मुलाकात कर ले
प्राइवेट काम करूं था तो तेरी सेवा कम होवे थी
इबके नौकरी सरकारी स मुलाकात कर ले
जिस टेम त आये स मेरे हाथा में दो पैसे
या ए बात सता री स मुलाकात कर ले
तू पिछली बार ख़ाली पर्स त बिल देना चाहवे थी
तेरी वा ए अदा भा री स मुलाकात कर ले
बाद में तो दो मिनट का भी ना टेम देवेगा बेचैन
जद तक बहू जा री स मुलाकात कर ले ..............मेरी आज तो जेब भारी स ......................

लो भाई ओ आज की दारुशाला से दो पैग आपके लिए


सबते पहल्या जिसने पी उसने मेरी राम राम
दारू की बोतल जिसने ली उसने मेरी राम राम
दारू जिसने पहल्या बनाई वो मानस नहीं भगवान था
दुःख की दवा बनावन आल्ला क्यूकर कहू इन्सान था

जुग- जुग जीवे काडनिया जुग जुग जीव ठेकेदार
माटी का जिसने प्याला बनाया जुग जुग जीवे वो कुम्हार
उन कीड़ा का भी हो भला जो बार बार दारू चाहवे स
अर उनके पैरा में प्रणाम जो बिना पानी पी जावे स