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Monday, 27 June 2011

मेरी हरियाणवी मधुशाला से आपके लिए दो पैग आज के लिए...............


गुड बरगे मीठे मन त रोज़ बनाऊ मैं दारू
फेर साँझ सवेरे धुप जला पटियाला से पैग मारू
उठा हाथ में पूरी बोतल, एक ही घूट में पी जाऊ
सों साल की उम्र दोस्तों एक ही रात में जी जाऊ

बेगाने शहर में ठेका, ढूँढना बड़ी बात नहीं
दारू की खुशबू न रोके, किसे की ओकात नहीं
किसे भी चोराहे की एक राह पर देख चाल क
थमने लोग झूमते पावेंगे, दारू गिलासा में घाल क

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