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Monday, 1 August 2011

सदबुधी दे उननै जिनके, ओछे रिश्तेदार होवे


जल्दी त कोथली पहुंचा दे भाई, तीज आगी स
दे-देके ताने नणद अर सास्सू जी न खागी स

जब त लाग्या सामण तब त, योए दुखड़ा सह री सूं
के आवेगा,, के कुछ होगा, अपने आप त कह री सूं
ब्योंत स माडा पीहर का मैं इस रास्से में बह री सूं
फेर त्यौहार के नाम पे मेरी शामत लागी स.......दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

माँ और बाप रहे कोन्या मेरे  दो भाई स वे कमज़ोर
बड़ी मुश्किल त पाल रे टाबर बिना नौकरी डांगर ढौर
देवेंगे वो बेबे न कुछ बता क्यूकर मार देवू मैं बोर
मेरे भाईया खातर हाय गरीबी जाल बिछागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

मेरी देवरानी और जिठानी ज्यादा मुह इतरावे स
जिस  कारण उनके घर त भर-भर झोले आवे स
मेरी हालत पे कोए ना हाय र तरस खावे स
या किस्मत की काली परछाई मेरे उप्पर छागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

तीज मुबारक हो सारया न, सबका बेडा पार होवे
याहे दुआ देवे गरीबनी ना किसे की भी हार होवे
सदबुधी दे उननै जिनके, ओछे रिश्तेदार होवे
बात पते सबने बेचैन गरीबी बतागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

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