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Thursday, 20 June 2013

वो देके हलक में डंडा मेरा हाल पूछे सै

 वो देके हलक में डंडा मेरा हाल पूछे सै
के पूंझड जवाब दूं रोज एक ए सवाल पूछे सै

बता मैं सुथरा लागूं सूं अक चाँद सुथरा सै
वो बिखेर के फेस पै जुल्फा का जाल पूछे सै

माँ का दूध पीया सै तो बाहर लिकड के दिखा
 जी तै रोज उसकी यादां का जंजाल पूछे सै

मैं शीशा देक्खण लागूं सूं जद भी गलती तै
कौण सै शक्ल की काली पडती खाल पूछे सै

मेरे तै कंधे पै लादण का किसा मज़ा आया
रोज दांत काढ के बिक्रम तै बेताल पूछे सै

सारे दिन लाग्या रहवे सै आंच सुलगाण में
गळगी सै कितणी अक लोगबाग़ दाल पूछे सै

मन बेचैन और करूं अक इतणा ए बहोत सै
डेली भीतरले में उठता भूचाल पूछे सै

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