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Friday, 4 November 2011

चुप थोड़े रहूँगा

मौका लाग्या सै आज चुप थोड़े रहूँगा
चाहे हो किसे कै खाज चुप थोड़े रहूँगा

मन की भडास सारी ए लिकाड़ दयूंगा
चाहे बुरा मानो समाज चुप थोड़े रहूँगा

अच्छे और बुरे की सब समझ आवे स
मैं भी खाऊं सूं अनाज चुप थोड़े रहूँगा

पैरां त पैदल सूं मगर दिमाग त नही
जब खुलग्या सै राज़ चुप थोड़े रहूँगा

मेरी शराफत उननै कमजोरी लागे सै
बणना पड़ेगा बेल्याज़ चुप थोड़े रहूँगा
क्यूकर जतावेगा वो अहसान मदद का
मैंने दे राख्या सै ब्याज चुप थोड़े रहूँगा

बेशक देर सवेर करूं दुश्मना का बेचैन
करके छोड़ना सै इलाज़ चुप थोड़े रहूँगा

Thursday, 3 November 2011

फफेड दयूंगा



धरके एडी बहम थारे सब उखेड दयूंगा
मतन्या एंडी पाको ना तो फफेड दयूंगा

लाल मिर्च सा लडूंगा तीखा मैं बैरीया क
मन भिर्डा के छत्ते न जब भी छेड़ दयूंगा
ज्ञान घणा सा झाडेगा जो कोए बढ़कर
उसकी अक्ल के दरवाजे मैं भेड़ दयूंगा 
कितणी ए खिलाफत करलो मेरे बारे में
एक दिन करी कराई पै पाणी गेड दयूंगा

कुछ वक्त की यात्ता होई कुछ माडे हालात
कद सोची थी बेचैन दिल में तरेड दयूंगा
 

Wednesday, 2 November 2011

माणस के स तू

 खूब तरक्की कर ली, फेर भी जूतम पैजार माणस के स तू
सब लूटके खाग्या फेर भी रहग्या भूखा यार माणस के स तू

कहवे वंशज़ माहरे देवता थे, पर तू कित त आया
कित त झूठ चोरी जारी और मक्कारी न ल्याया
सोच-सोच के पागल होग्या मैं तो सौ-सौ बार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

जित फायदा नजर आवे ,वहां जात दिखा दे स
वक्त पड़ण पै गधे न भी क्यूं बाप बणा ले स
नकली दंगल बोल्ले स तैने क्यूं तेरे रिश्तेदार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

कहवे आदमी खुद न और ढंग डांगरा आल्ले
ना भर पाया पेट छोटा सा तू उम्र भर साल्ले
उसकी खाट खड़ी कर दे ,जो तेरे पै करे उपकार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

जुबान इतनी मीठी बणाली गुड भी शर्मावे
आस औलाद और सू राम की बिन सोचे खावे
दान धर्म और दया का झूठा बण रह्या ठेकेदार माणस के स तू 
सब लूट के खाग्या.................

लोभ हवस के बाळ पलक त क्यूं नही पड़वाता
खूबसूरत बाहण छोड़ क्यूं दिल और पै ल्याता
हर वक्त रहवे बेचैन और बोल्ले खुद न समझदार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

Monday, 31 October 2011

दिल में सदा गीता और कुरान राखियो

बणना चाहो कलाकार तो ध्यान राखियो
उस्ताद और प्रशंसका का मान राखियो

कदे भी नही फसोगे यारों धर्म संकट में
दिल में सदा गीता और कुरान राखियो
ज्यादा बड़ी प्लानिंग की जरूरत नही स
बस थोडा सा दुश्मन न परेशान राखियो
के भरोसा नसीब में हो एक और तलवार
छिपा कर थम अलग त म्यान राखियो
एक दिन तो काम की बात सुनाई देवेगी
थम यारों खुले अपने दोनों कान राखियों
बेशक तारे महबूब खातिर तोडण जाइयों
पर मां बाप के ख्वाब की भी आन राखियों

मजिल त भी आगे की दुनिया दिखा देवेगी
बेचैन मीठी सदा बस अपनी जुबान राखियों


Sunday, 30 October 2011

ना दिखाईयो कदे ज़ात चौधरी बणन खातर

ध्यान में राखों बात चौधरी बणन खातर
होणी चाहिए औकात चौधरी बणन खातर

घर की गाडी ना समझों, दहेज़ आल्ली कार
अपना जुगाड़ जगन्नाथ चौधरी बणन खातर
विरासत में तो बाप मैन्ने दुनिया देग्या था
 न्यारी करूं सूं खुबात चौधरी बणन खातर
किराये के माणस कत्ति धापके नकली हो स
घर का ए चाहिए गात चौधरी बणन खातर
जो अपणे दम प जिंदा स उनते पूछ क देख
कितने लगाये दिन रात चौधरी बणन खातर
मेहनत पर विश्वास करो सब ठीक होज्यागा
ना दिखाईयो कदे ज़ात चौधरी बणन खातर

बस टांग खिंच के कदे ना उपर चढ़ीये बेचैन
उच्चे राखियें ख्यालात चौधरी बणन खातर

Sunday, 9 October 2011

बाप बेटे की जब त बिगड़ी



न्यू तो टाइम पास हो रह्या स
पर थोड़ा सा नाश हो रह्या स
दोस्त शक के घेरे में आग्या
दुश्मन कुछ ख़ास हो रह्या स
नई रिश्तेदारी टूटेगी शायद 
कसूता ए मिठास हो रह्या स  
बाप बेटे की जब त बिगड़ी
परम्पर त बनवास हो रह्य स
लवर की नही खा मां की सूं
तेरे प कम विश्वास हो रह्य स
अनजान हादसा सोचके बेचैन
थोडा सा मन उदास हो रह्या स

Wednesday, 5 October 2011

शूर्पनखा की माना तो,भाई होवे रावण बरगा




दशहरे के मौके पै आओ उल्हाना उतार देवां
अपने अपने मन का मिलके रावण मार देवां
हम भरत लक्ष्मन सा तो राम की सेवा करां
या फिर राम बनके छोट्या पै सब वार देवां
दिलों दिमाग त नफरत का ख्याल काढ के
अपने हर रिश्ते नै प्यार के बदले प्यार देवां
इज्जतदार समाज हो सोच गर या लेरे सो
छोरियां नै लेके आओ नजरियाँ संवार देवां
बेशक जाके चाँद पै कोए भाई प्लाट कटवाले
पर सदा औकात नै हम जमीनी आधार देवां
शूर्पनखा की माना तो,भाई होवे रावण बरगा
इस सच्चाई पै आओ अपणे हम विचार देवां 
जात धर्म गरीबी और महंगाई की दुश्मन हो
बेचैन समाज नै हम मिलकर वा सरकार देवां


Tuesday, 27 September 2011

भगत सिंह के जन्मदिवस पर एक खास कविता



स्वर्ग में सुखदेव बोल्या भगत सिंह त
आज्या-आप्पा नीच्चे चाल के भारत में फेर त जन्म लेवां.|
और सबते पहल्या पाकिस्तान न कश्मीर देवां....|
यो आजकाल किम्मे घणा एंडी पाक रह्या स
बात बात पर ओकात त बाहर झाँक रह्या स
ल्या गिलानी के वारें न्यारे कर देवां
तले चालके इसके दो चार धर देवां
सुनके भगत सिंह पहलया तो हांस्या अर फेर खास्या
और बोल्या----
भाई सुखदेव बात तो तेरी सही स
पर भारत में इब पहल्या बरगी बात नही स
उस टेम भारत स्वर्ग था, तो आज एकदम नर्क स
पहल्या में अर आज में दिन रात का फर्क स
पहलया तो किते किते गदार होया करते
जयचंद बरगे लाखां में दो चार होया करते
पर आज तैने हर घर में गदार दिखा दयूंगा
बेशक चाल निच्चे, देश लूटनिया की कतार दिखा दयूंगा
बाड़ खेत न खाती, अपणी आंखां त देख लिए
भारत मां की घायल छाती अपणी आंखां त देख लिए
इब भगत सिंह और सुखदेव नीचे आ गए
और गलती त अयोध्या उतरगे
वहां कुछ मुसलमान भाई बैठे बतलाण लाग रे थे
एक दुसरे को याहे बात समझाण लाग रे थे
अयोध्या में मन्दिर बन जावे तो माहरा रोज़गार सवंर जावे
क्यूकी हिन्दुओ के तेतीस करोड़ देवी देवता बतावे स
और ये श्रद्धा के मारे सब प कुछ न कुछ चढ़ावे स
या फेर न्यू कहवा
 के देश में रोज़गार न मन्दिर ए तो बढ़ावे स
पर माहरे मुसलमान भाईया का जुगाड़ इसा नही स
तेतीस करोड़ देवता धोंक दे इतना पिस्सा नही स
यो क्लेश तो हिन्दू ए काट सके स
श्रद्धा का मारया यो सोने का लड्डू बाँट सके स
अर सोचन की बात स
जद अयोध्या में सोने के लड्डू बंटेंगे
फेर रंग तो वहां रहनिया के छटेंगे
सुण के सुखदेव भगत सिंह हैरान होगे
मंत्रीया की बात याद कर कर के परेशान होगे
अयोध्या मसले पर इनने बवाल मचा राख्या स
अर सारा देश एक टांग प नचा राख्या स
पर कोए अह्योध्य में जाके देखे , मामला ए कुछ और स
मन्दिर बनवान का नारा मुसलमानों में पुरजोर स
सोचते सोचते सुखदेव भगत सिंह की आँख भर आई
अर फेर पकड़ ली उन नै  सरहद की राही
वहां कुछ नौजवान बैठे बतलाण लाग रे थे
एक दूजे को या ये बात समझाण लाग रे थे
सरहद प जिस दिन बेरोज़गारी मिट ज्यागी
आंतकवाद की फोज़ अपने आप पिट ज्यागी
भगत सिंह बरगे कारनामे हम बी कर सका सां
गरीबी अर बेकारी मिट जावे तो देश प मर सका सां
नौजवान की बात सुनके भगत सिंह और सुखदेव चुपचाप चल पड़े
और संसद भवन में पहुचगे
वहां कुछ मंत्री बतलाण  लाग रे थे
एक दुसरे न याहे समझाण लाग रे थे 
बहुत मेहनत करके दिल्ली तक पहुंचे सां
वो लोग पागल स जो हमने कहवे टुच्चे सां ]
मंत्री बनते टेम आँख चार होज्या स
कुर्सी  के चक्कर में आत्मा तक बीमार होज्या स
आज एमसी बनने में बी पसीने आवें स
संसद भवन के गलियारे सबने थोड़े थ्यावे स
इतने में एक नया मंत्री बोल्या इसमे तो कोए शक नही स
पर हम जो घोटाले करां सा, के वो बिलकुल सही स ,,?
सुनके बाकि के मंत्री पहलया तो सकपकाए
फेर आँख मार के एक दूजे की और मुस्कुराये
अर बोले
इसमें माहरा कोए कसूर कोन्या
आज के दिन जनता न ए सूर कोन्या
जनता में जब तक फूट रह्वेगी
देश लूटण की छुट रह्वेगी
जनता के जब तक एक विचार नही होवेंगे
देश का माल मंत्री न्यू ए ढोवेंगे
सुण के भगत सिंह सुखदेव न सोची
मंत्री मटे बात तो ठीक कहवे स
आज भारत मां की आँख त आंसू
जनता की बदौलत बहवे स
पर या बात जनता तक पहूंचावे कौण...?
एक एक आदमी न जाके समझावे कोण...?
पार्टी बाज़ी अर जात पात जब तक जिंदा रखोगे
भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............भारत मां न दुनिया में न्यू ए शर्मिंदा रखोगे .............