khas log

Friday, 14 June 2013

आदमी की सबसे बड़ी हिम्मत उसकी लुगाई हो सै


छोटी छोटी बात पै बेशक कितनी ए लड़ाई हो सै
आदमी की सबसे बड़ी हिम्मत उसकी लुगाई हो सै

पत्थर की भी छाती चीर दे सच में तारे तोड़ ल्यावे
अगर मेहनतकश की सच्ची हौसला अफजाई हो सै

किसे की हाय लागै प्यार में तो सदा याद राखियो
नजर उतारण की खातिर बस नूण और राई हो सै

उस हरामी धन का के कमीनेपण तै कोए जोड़ ले
असली दौलत तो अपणे दस नूआं की कमाई हो सै

रिश्तेदारी हो या महोब्बत पल्ले गांठ मार लियो
सच्चाई की झूठ बोलण तै ना कदे भरपाई हो सै

अपनापण दिखावे तो बेटे तै भी बढके दिखा दे
कमीनेपण पै आवे तो खतरनाक जमाई हो सै

जब तक जिन्दा रहवैगी माँ बाप नै भूलती कोन्या
बेचैन झूठ कहवे सै लोग बेटी तो पराई हो सै

Wednesday, 20 February 2013

तैने दर्द किते दिखे सै तो मलहम बणके लाग



मैं जज्बाता के दलदल में धंसता जा रह्या सूं
कहणा तो बहुत कुछ सै पर कह नही पा रह्या सूं

तू दिल पै अपणे हाथ धर के खुद तै जवाब दे
मैं जिकरा बार-बार किन बातां का ठा रह्या सूं

कोए और स्यामी होता तो कर लेता फैंसला
मुद्दत तै मैं तो अपणे आप तै टकरा रह्या सूं

तैने दर्द किते दिखे सै तो मलहम बणके लाग
ना तो फेर महफ़िल में मैं खूब मुस्कुरा रह्या सूं

ध्यान तै फूंक मारिये मेरे जख्मा पै बेचैन
मैं पह्ल्या ए दही के भ्रम में कपास खा रह्या सूं



Wednesday, 16 January 2013

एक टुकड़ी आशिको की भेजो पकिस्तान में

नफरत का जवाब दयो प्यार की जुबान में
एक टुकड़ी आशिको की भेजो पकिस्तान में

ग्रह युद्ध छिडवा दयो कुछ न समझ सके कोई
थम ऐसी फूंक मारो उनकी बेगमा के कान में

थोड़ी राजनीती की ऐसी तैसी होरी सै वरना
कोए फर्क नही सै भाइयों हिन्दू मुसलमान में

पाप करणीये नै मारना पाप नही कहलावे सै
साफ़-साफ़ लिख्या सै गीता अर कुरआन में

मामला दिल का हो या देश का हमेशा तै बेचैन
ऊपर पड्या थुक्या जिसने मुह करके आसमान में

Saturday, 22 December 2012

न्यू बता दे कोण सी चक्की का तू आटा खावे सै

इस उमर में भी अदाओ की बिजली गिरावे सै
साचम साच बता बैरण तू आखिर के चाहवे सै

बाकि तो अंदाजा मैं अपणे आप ए लगा ल्यूँगा
न्यू बता दे कोण सी चक्की का तू आटा खावे सै

तैने देख के छोरे ए नही छोरी भी पूछे सै
जवान दिक्खण का तू कोण सा फार्मूला अपनावे सै

देख गाम के विकास की चर्चा तो तेल लेवण गई
बूढ़े भी चौपाल में तेरा ए जिक्र उठावे सै

थोड़ा ढंग तै चाल्या कर सजधज के बालका की ताई
क्यूं बेचैन बरग्या की तू खाट खड़ी करवावे सै



Saturday, 8 December 2012

बंद कर दी सै तेरी फाइल तू ऐसी तैसी करवा



ल्यों हमनै बदल लिया स्टाइल तू ऐसी तैसी करवा
बंद कर दी सै तेरी फाइल तू ऐसी तैसी करवा

तैने हर वक्त ऑनलाइन कोए और ए दिक्खेगा
ले आया सिम्पल सा मोबाइल तू ऐसी तैसी करवा

किसे का भी बंधन नही इब रहूँगा मालिक मर्जी का
मैं दयूंगा हरेक नै स्माइल तू ऐसी तैसी करवा

अपना प्यार ढूंढण आई तो फिसल के पड ज्यागी
बिछवा दी सै दिल पै टाइल तू ऐसी तैसी करवा

शक्ल के साथ अक्ल भी बेचैन चकाचक करली सै
बेशक देख मेरा प्रोफाइल तू ऐसी तैसी करवा

Sunday, 28 October 2012

नही करणा मैने प्यार तू अपणी याता करा

नही करणा मैने प्यार तू अपणी याता करा
मैं क्यूं करू इंतजार तू अपणी याता करा

जद भी जी करे सै मुह नै फुलाके बैठ ज्या सै
करे ना फालतू तकरार तू अपणी याता करा

जरा जरा सी बात पै तेरी हवा लिकड ज्या सै
ओये पुन्झड के दिलदार तू अपणी याता करा

मैंने भी आवे सै गुस्सा मैं चिल्लाणा जाणु सूं
ना खावे इतणी खार तू अपणी याता करा

आदत अपणी बेचैन जीते जी ना बदलेगी
हम सा यारा के यार तू अपणी याता करा

Monday, 1 October 2012

छोड्गी क्यूं मैंने मेरी जान मझधार में



रोऊ सूं पड्या मैं एकला सोच विचार में
छोड्गी क्यूं मैंने मेरी जान मझधार में

के था कसूर मेरा बोल के नही गई
गाँठ नाराजगी की खोल के नही गई
हाय के करूं मेरा दम घुटता जा रह्या सै
मैं ए जाणु सूं सांस क्यूकर आ रह्या सै
कोन्या सै जीवण का इब मन संसार में ........
छोड्गी क्यूं मैंने .....................

नाम नये उसके रोज धरया करता
कदे लाडली कदे लाडो कह्य करता
हौसला बढ़े था वो जद मुस्कुरावे थी
रग रग में लहू बनके दौड़ लगावे थी
बेरा ना के होया सै चाणचक प्यार में
छोड्गी क्यूं मैंने .....................

बजगे सै बारा मेरी दोस्तों शक्ल में
ढूंढ़ रह्या सूं उसने दर्द की गजल में
इसा लागे सै वा जणू इब्बे आवेगी
सर मेरा ठाके गोद में धरावेगी
सांस चाल री सै इस्से एतबार में
छोड्गी क्यूं मैंने .....................

वक्त तेरा नाश जावे तैने खूब करी
गलतफहमी में भर दी मेरी चाँदपरी
सामण की ज्यूं बरसै सै आँख सवेर तै
मैं नही पाउँगा गर सुध लेई देर तै
आत्मा बेचैन सै उसके इंतजार में
छोड्गी क्यूं मैंने .....................