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Friday, 20 April 2012

होता गर मैं गलती तै दुधिया मेरी जान




होता गर मैं गलती तै दुधिया मेरी जान
तुझे किलो दूध फालतू मैं रोजाना देता

शुक्र सै कोन्या मेरी परचून की दूकान
नही सारा सौदा फ्री में तेरा दीवाना देता

न्यू भी लड्डू सा भुरभुरा स्वभाव सै मेरा
कितना ए फोड़ के खा ना उल्हाना देता

मैं बेशक तै बेचता एक्सपाइरी सामान
पर तैंने कदे भी नही माल पुराना देता

इसकी मौज सै इसके यार कै कारण
 फेर तो पूरा गाम तैंने यो ताना देता

तेरे हिस्से की लामणी भी मैं कर देता
वक्त गर साथ काम करण का बहाना देता

बेचैन होकर करता मैं इतनी चाकरी
मिसाल मेरी मेरे बाद यो जमाना देता

Saturday, 17 March 2012

जा अचार घाल लिए अपणे दिल का

राह गलत इश्क की मैं नादान पकड़ बैठ्या
एक बावळी गादड़ी के कान पकड़ बैठ्या

ईब कुछ समझ नही आ रह्या के करूं आखिर
क्यूं मैं अपनी मौत का सामान पकड़ बैठ्या

मैं ठहरा बंदर भला के जाणु अदरक का स्वाद
दही समझ कपास का खलिहान पकड़ बैठ्या

अक्सर तबियत खराब रहण का यो कारण सै
बदले में दिल न मिलण का नुकसान पकड़ बैठ्या

जा अचार घाल लिए अपणे दिल का बेचैन
गलती होगी तन्ने मेरी जान पकड़ बैठ्या














Thursday, 15 March 2012

मत सोचिये मैं गुजरा होया दौर होग्या सूं

ना पूछ इश्क में कितणा कमजोर होग्या सूं
आजकल साँस लेवण का भी चोर होग्या सूं

पहल्या सी बात मेरे में किसे नै ना दिखती
दोस्त कहरे सै मैं तो कुछ और होग्या सूं

तू ख्यालों में आके लगा ले बाता में
मैं तो पड्या-पड्या कमरे में बोर होग्या सूं

जद आवे मेरी याद आवाज़ देके बुला लिए
मत सोचिये मैं गुजरा होया दौर होग्या सूं

सिर्फ एक बार बोल फेर नही पूछेगा बेचैन
अगर सच्ची तेरे कलेजे की कोर होग्या सूं

Wednesday, 14 March 2012

इन दिनों लुगाई नाराज चाल री सै

इन दिनों लुगाई नाराज चाल री सै
बेरा नै उसके कित खाज चाल री सै

पहल्या तो देख लिया करती मुस्कुराके
आजकाल गुस्से में बेल्याज़ चाल री सै

वा न्यू लिकाडै सै बात के कई मतलब
बोली नजर थारी दगाबाज़ चाल री सै

इलाज़ तो मन्ने भी कुछ करना पड़ेगा
वा ज्यादा ए खाके अनाज चाल री सै

कसूर कोन्या उसकी सोच में बेचैन
पतियों की फौज दगाबाज़ चाल री सै 

Thursday, 1 March 2012

आप बी रांड हो ..हम बी रांड हैं ..

एक बे एक गाम में इंदिरा गाँधी की सभा थी .. नारी- मुक्ति पे ,, ज्याँ कर के ने घणी सारी लुगाई बी कट्ठी कर राक्खी थी ..एक अंग्रेज forein delegate बी गेल्याँ आ रहया था ..
इंदिरा जी ने भाषण देणा शुरू करया ते रमलू की माँ उनने देखण तई खड़ी होगयी ... नत्थू सरपंच ने रुक्का मारया - आ रांड धरई जा !!!!
अंग्रेज ने पूछ लिया - What is Raand??
इईब उसते के बताते .. एक journlist बोल्या ..रांड means Great.. सबने सांस ल्यी...
अंग्रेज ने बोहत बढ़िया लाग्गया ..
वो आपणी टूटी सी हिंदी में बोलल्या - आप बी रांड हो ..हम बी रांड हैं ..पर इंदिराजी सबसे बड़ी रांड हैं ....

लुगाई तै बड़ा जादुगर नही सै धरती पै

मरण तै पहल्या माँ मैन्ने सही बतागी थी
लुगाई तै बड़ा जादुगर नही सै धरती पै

इश्क करया पाछे या बात समझ में आई
एक इज्जत तै बड़ा डर नही सै धरती पै

महबूब या भगवान का सजदा करया सै
कोए बिन झुक्या होया सर नही सै धरती पै

झील समन्दर पार्क सबके सब बकवास
कोए महबूबा तै सुंदर नही सै धरती पै 

सब पुराणी हरकता का अंजाम सै बेचैन
कोए भी तो ताज़ा खबर नही सै धरती पै  

तू हंसके बोल दे सै तो स्वाद आज्या सै

हलवे का अहसास मेरे याद आज्या सै
तू हंसके बोल दे सै तो स्वाद आज्या सै

तू साथ रहवे सै तब तक तो खुश रहू सूं
आंसू तो तेरे जावण के बाद आज्या सै

तू मेरी दुखती रग सै तू खूब जाणे सै
क्यूं तेरे नाम तै जख्मा राध आज्या सै

जद भी होया सै मैंने अहसास गलतिया का
होठों पै मुआफी की फरियाद आज्या सै

उसके प्यार में कोए कमी कोन्या बेचैन
पर वक्त बनके बीच में जल्लाद आज्या सै

बालक भी मेरा चेहरा पढ़ ज्या सै

दिलों-दिमाग पै नशा सा चढ़ ज्या सै
तैने देख के मेरा खून बढ़ ज्या सै

नाराज होके जद तू होवे सै गायब
नूर मेरी शक्ल का सारा झड़ ज्या सै

तेरी कसम मैं तो तैने भूल भी जाऊ
पर तेरी याद मेरे पीछे पड़ ज्या सै

मैं तो हमेशा चाहू सूं खुश रहणा
पर आंसू अपनी जिद पै अड़ ज्या सै


बेचैन होने इससे बड़ा के सबूत दूं
बालक भी मेरा चेहरा पढ़ ज्या सै

Sunday, 15 January 2012

मुस्कुराके बोलण का तू खूब ए फायदा लेरी सै


इन दिनां तू प्यार कम मेरे स्वाद ज्यादा लेरी सै
जाणग्या बस खाट खड़ी करण का इरादा लेरी सै

मेरे भीतर का शक तेरे त बार बार न्यू पूछे स
किसके साथ मेरा धुम्मा ठावण का वादा लेरी सै

अपणा कसूर सर पै मेरे जद चाहवे धर दे सै
मुस्कुराके बोलण का तू खूब ए फायदा लेरी सै

क्दे क्दे तो तू महबूबा त मेरी माँ बणज्या सै
समझ नही पा रहया सू यो के इरादा लेरी सै

सबके बसकी ना होवे सै किसे की याद में रोणा
जाणे सै बेचैन तू आँख में जिसा कादा लेरी सै

Friday, 6 January 2012

जाट के आगे भुत भी नाचे सै

एक बारी, एक जाट नें शमशानघाट में हल जोड़ दिया भूत किते बाहर जा रह्या था. भूतनी जाट न डरावन खातर कांव कांव करण लागी. पर जाट ने कोई परवाह कोणी करी. आख़िर भूतनी बोली “तू यो के करह सै” जाट बोल्या “में उरे बाजरा बोवुंगा” भूतनी बोली “हम कित रहंगे” जाट बोल्या “मनें ठेका नि ले राख्या. भूतनी बोली “तू म्हारे घर का नास मत करै, हाम तेरे घर में 100 मण बाजरा भिजवा दयांगे”. जाट बोल्या “ठीक सै लेकिन तड़की पूंचना चाहिए नि तो में आके फेर हल जोड़ द्यूंगा” शाम नै भुत घर आया तो भूतनी बोली आज तो नास होग्या था. न्यूं न्यूं बणी अर जाट 100 मण बाजरे में मसाए मान्या. भुत ने भोत गुस्सा आया और बोल्या तने क्यों ओट्टी, मन्ने इसे जाट भोत देखे सै. मन्ने उसका घर बता में उसने इब सीधा कर दयुन्गा. अर भुत जाट कै घर चल्या गया. जाट कै घर में एक बिल्ली हील री थी. वा रोज आके दूध पी जाया करदी. जाट नै खिड़की में एक सिकंजा लगा लिया और रस्सी पकड़ के बैठ ग्या अक आज बिल्ली आवेगी और मैं उसने पकडूँगा. भुत नै सोची तू खिड़की मैं बड़के जाट ने डरा दे. वो भीतर नै सीर करके खुर्र-खुर्र करण लाग्या आर जाट नै सोची – बिल्ली आगी. उसने फट रस्सी खिंची आर भुत की नाड़ सिकंजा मैं फस गी आर वो चिर्र्र – चिर्र्र करण लाग ग्या. जाट बोल्या रै तू कोण सै ? वो बोल्या मैं भुत सूं. जाट बोल्या उरै के करे सै ? भुत बोल्या “मैं तो न्यू बुझंन आया था एके तू 100 मण बाजरे मैं मान ज्यागा अके पूली भी साथै भिजवानी सै? ठीक कही सै – जाट के आगे भुत भी नाचे सै