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Monday, 4 July 2011

लो भाई ओ संडे के नाम के आज के मेरी दारुशाला से दो पैग



दारू पीवण आल्या न या कदे नहीं बदनाम करी
जिसने पैग लगाये नहीं, उसने बुराई आम करी
हार जीत दोनु सुरता में दारू साथ निभावे स
फेर दुनिया आल्ले ठेके की क्या त चुगली खावे स

चोबीस घंटे ख़ुशी रहवे स दारू के ठेके में भाई ओ
जिसने मौज मस्ती चाहिए आके बोतल ले जाइयो
या स्वर्ग लोक की शहजादी दुःख दर्दा त दूर रहवे
जो भी एक ब चख लेवे इसने दारू की पुडिया कहवे

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