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Monday, 23 April 2012

तीसरा आप्पे कर ले

एक गुरु और उसका चेला कुटिया में सोने की तय्यारी कर रहे थे. गुरु बोला—चेले झांकी बंद करदे, हवा आ रही सै. चेला बोला—गुरु जी चादर ओढ़ ले हवा नहीं लागैगी. गुरु बोला—अच्छा दीवा बुझा दे. चेला बोला—गुरु जी आंख मीच ले तेरे लेखै अँधेरा होगया. झल्लाया गुरु बोला—अच्छा तो कुवाड भेड़ ले. चेला बोला—देख गुरु जी दो काम मन्नै कर दिये, तीसरा आप्पे कर ले 

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