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Friday, 15 July 2011

मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…

एक बान्दर एक बान्दरी से बोल्या मैं हुक्का पी आऊं । बान्दरी बोल्ली जा पिया। वह हुक्का पियण चला गया तो वहां चार पांच आदमी बैठे थे और उन्होने चिलम झाड राखी थी। बन्दर जा कर उस चिलम के ऊपर बैठ गया । चिलम में बिरहड बैठी थी वा उसकै लड गई। बन्दर तो वहां से उछलता हुआ बान्दरी के पास आया……..... .बान्दरी बोल्ली हुक्का पी आया…….?
बांदर बोल्या……हु क्का के पिया……..मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…

चाइनीज काटडी

राकेश खूंढ़े की चाह की दूकान फेल होगी | तो उहने महम आले मेले में २०-२५ काटडी बाँध ली बेचन खातर |
जीतू मान-- आं भाई काटडी कितने की दी ?
राकेश खूंढा -- ५०० रापियाँ की |
जीतू मान -- इन्नी सस्ती क्यूकर ?
राकेश खूंढा--- चाइनीज सें |आड़े तो रिंगा के दिखा दयुन्गा अर जा घरां जा कें भोंसन्न लागी तो गारंटी ना स |

Thursday, 14 July 2011

आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई

रमलू के पड़ौस में एक नई बहू आई थी । रमलू हुक्के की चिलम भरण का ओडा (बहाना) ले कै रोज उस घर में चला जाया करता । कुछ दिन पाच्छै बहू आपणै पीहर चली गई, रमलू नै इस बात का बेरा ना था ।

रमलू चिलम ले कै पहुंच ग्या अर इंघे-उंघे नै देख कै बुढ़िया तैं बोल्या - ताई, आग सै ?

ताई बोली - बेटा, आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई !!

बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी

एक नया रंग

बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी
बात मेरी याद सदा राखियों छोरयो
ईट का जवाब पत्थर गेल मिलेगा
छोटे कानी हाथ ना बाँकियो छोरयो
नशा करे नाश देई और पिस्स्या का
धुम्मा दारू कदे भी ना चाखियो छोरयो
बुढ़ापे तक थारा पक्का साथ देवेगी
बात बड़े-बुढया की हांकियो छोरयो
शेर न सदा ए सवा शेर मिल्या स
भूल के भी एंडी ना पाकिओ छोरयो
इश्क में बेचैन नहीं होणा पड़ेगा
महबूब आगे गप्पे ना हाकियो छोरयो 
                 ---- वी एम् बेचैन, भिवानी
मोबाइल नम्बर 9315373754  9034741834

Wednesday, 13 July 2011

देश में जद भी देश भक्ति का जिक्र उठता है तो माहरा ध्यान पाकिस्तान की तरफ चल्या जावे स ..सोचन की बात स के पाकिस्तान नहीं होता तो के हम देश भक्त नहीं होते,, ऐसा नहीं है सच्चाई ये स अक हम देश भक्त ए होते तो पाकिस्तान कोन्या होता,,, देशवासिया की देशभक्ति न ध्यान में रखते होए हरियाणवी जोश की एक कविता,,,, मान ज्यां पाकिस्तान

तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
मिंटा में हुलिया बिगड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
घर की देई ना हो जिसकी वे लड्या नहीं करते
अर शेरां की बस्ती में कुते बड्या नहीं करते
फेर के सोच के सरहद पे तू लिकड़े तोड़े स
अर उग्रवाद के कुते माहरे कानी मोड़े स
एक बात पते की कह रह्य सू, सुन ले पाकिस्तान
इरादे थारे न्यू छड़ागे, जणू छड़ा सां धान
तू गौरी मिसाएल  लेके बेशक पहाडा उप्पर बैठ
तेरे लगेंगे जद उलटे सीधे, लिकड जावेगी ऐठ
हिमायती तेरे तैने पिछानन त मना कर देंगे
जिस दिन हिन्दुस्तानी तेरी सोढ़ भर देंगे
फेर रोवेंगा माथे पर धरके हाथ बेटा तू
सोचेगा लिकड़ा सूँ, मैं इतना सपरेटा क्यू
सारा तेरा नशा झडेगा मान ज्यां पाकिस्तान ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
इतनी जल्दी कारगिल आल्ली मार भूलगया तू
हिदुस्तानी तिल की तेज़ धार भूलगया तू
बहोत निकम्मा बहोत घटिया बहोत पिटाउ तू
र पाकिस्तान तेरी हरकत न किसकी संघ्या दू
जान बुझ के मौत न मौसी कहणा छोड़ दयो
धरती त खू जाओगे नशे में रहणा छोड़ दयो
गुस्से में ना ल्याओ थारी हम रेल बणा दयांगे
पाकिस्तानी लीडरा खातर जेल बणा दयांगे
अर बिछा के कम्बल गेर के मुदा खाल तार दयांगे
परमाणु के कीड़े थारे तुरंत मार दयांगे
भारतीया की ताक़त का अंदाज़ा कोन्या थमने
गेंद त ज्यादा ना समझा हम सरफिरे बम न
पर बम थार थमने राग्डेगा मान ज्या पाकिस्तान --- ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
बात छोटी सी समझ सके तो समझ ले पाकिस्तान
कित स तेरी जनसंख्या अर कित स हिंदुस्तान
तेरी टांग तोड़ के लंगड़ा कर दयां, आँख फोड़ के काणा
अर तेरे उप्पर तो एकला यो भारी पड़े हरियाणा
अर एक एक हिन्दुस्तानी ज लघु शंका करण लागे
बढ़ आज्या पाकिस्तान में, लिकड के सारे भागे
अपना ए इतिहास आज तू खुद उठा के देख
कितनी बार पीटा स, मन में बात बिठा के देख
पर तू ---- पीटन का कोर्स करे स मैंने लागे पाकिस्तान
पार ठेका कोन्या लेवे तेरा इबके हिंदुस्तान
बहुत बड़ी स दुनिया टक्कर मार किते भी जा
के लेना स तेरे त हमने, बेशक गोबर खा
तू ज्यादा देर नहीं अक्डेगा मान ज्यां पाकिस्तान,,,,, ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा

भाईओ इस गीत न गाके मुख्यमंत्री तक पहुचा दयो,,, शायद बात बन जावे और दुआ करो कामयाबी मिले मैं अगले हफ्ते त भाषा बनान के खातर हस्ताक्षर अभियान छेड़ रह्य सू,,, आप लोगो की मदद की जरूरत पड़ेगी ---------वींएम् बेचैन -९३१`५३७३७५४

माहरी बोली न भाषा बणा दयो एक ब आप हुड्डा जी
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप  हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........

राजस्थानी गुजराती अर पंजाबी न देखो थम
 कर रे सारे खूब तरक्की भाषा आल्ला लेके बम
माहरी तोप बरगी बोली थमने कित त लागे स या कम
माहरी छाती उप्पर त ठा दयो यो सांप हुड्डा जी ,,,,,,,,,,,फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप---

माहरी बोली भाषा बनगी तो फेर खूब जिस्सा आज्यागा
बिखरा होया सारा साहित्य एक ए जगह पाज्यागा
दुनिया भर में हरियाने का बच्चा-बच्चा  छाज्यागा
हाँ  चाँद तेई का ले दयांगे हम नाप हुड्डा जी----------फेर कट जावेंगे-----------------

जब--जब आया एक नवम्बर तब तब बांधी हमने आस
शायद हुड्डा जी कर देवे बोली खातर किम्मे ख़ास
हाय रे किस्मत सारया की न्यू ए अटक रही स साँस
माहरी अटकी सांस का कर दयो कोए जाप हुड्डा जी.........फेर कट जावेंगे हरियाणे के -----

युगां-युगां तक सीएम जी थारा नाम अमर हो जावेगा
भाषा आल्ला तुर्रा जिस दिन सिर तेरे बंध जावेगा
दुनिया भर में हरियाने का नाम चमकता पावेगा

भाषा बणन की ला दयो एक ब थाप हुड्डा जी------------
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप  हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........

Saturday, 9 July 2011

बिल उसने दिया

मैं जद भी गया रेस्टोरेंट बिल उसने दिया
ऑटो का आया जो भी रेंट बिल उसने दिया
वा सैन्डल लेवण गई तो मुझे बूट दुवा ल्याई
खरीदी मैंने जो भी पैंट बिल उसने दिया
कपडे प्रेस करान की भी दुकान बता राखी थी
छः महीन्या तक परमानेंट बिल उसने दिया
जो भी चीज़ पसंद आई यारां न गिफ्ट सेंटर म्ह
पंजी तक का सैंट परसेंट बिल उसने दिया
बेचैन बरगा प्यार भगवान दुश्मन न भी दे
कपड्या प छिडक्या जो भी सैंट बिल उसने दिया

ना चाहते हुवे भी नाम तेरा लेता है बेचैन



तुझे हंसने से फुर्सत न थी मुझे बेबसी से
फिर कैसे तार्रुफ़ करवाता तेरा जिंदगी से
कुछ भी ख्याल न आया मेरी हालत का तुझे
मुह छुपा कर रोता रहा मैं बैठा बेबसी से
क्यों नहीं समझते महोब्बत के तुम उसूल
दर्दे-दिल नहीं कहा जाता हर किसी से
मेरे जज्बात ना समझकर गजब किया तुने
अब जीता हूँ ना मरता हूँ अपनी ख़ुशी से
तुने जिस रोज़ से बुझाया उम्मीद का चिराग
रिश्ता सा कट गया मेरा हसरतो की रोशनी से
ना चाहते हुवे भी नाम तेरा लेता है बेचैन
क्यों कर दिया तुने आखिर लाचार जी से

र राजू प्यार ना करिए,

र राजू प्यार ना करिए, कोए देई बढ़ा देगा
किसी के कान ना भरिये कोए देई बढ़ा देगा
खाण कमाण ज्योगा ना छोड़ेगा इश्क तैने
दिल के चक्कर में ना पड़िए कोए देई बढ़ा देगा
खेतां में जावे तो गंडा पाड के बाहर होइए
भरोटी बांध कर ना धरिये कोए देई बढ़ा देगा
इश्क में भी मेहनत करेगा तो ठीक रहवेगा
माल हराम का ना चरिये कोए देई बढ़ा देगा
इन बुज़ुर्गा में त ए लिकड़ी स या जवानी
पहलवान ज्यादा ना स्वंरिये कोए देई बढ़ा देगा
आज पल्ले गांठ मार ले या बात मेरी बेचैन
किसे क टाबरा प ना मरिये कोए देई बढ़ा देगा

Friday, 8 July 2011

लो भाईओ हरियाणवी बोली की वा विशेषता जो जन्मजात हो स, या विशेषता उरे रहण त नहीं बल्कि जन्म घुट्टी में पीण त आवे स डबलिंग बोली हरियाणे की........

डबलिंग हरियाणे की सबते न्यारी स
जिसने आगि बोलनी वो सबपे भारी स
चाय- चूए, लास्सी- लुस्सी दूध-दाद देखो
चूल्हा-चाल्हा,रोटी-राटी, एक आध देखो
भैंस-भूंस,गाय- गुए, डांगर-डूंगर देखो
खोर-खार, नौरा- नारा, टींगर-टुंगर देखो
माणस-मुनस, खाना- खुणा. खाया-खुई करते
बूढी-बाढ़ी, लुगाई-पताई, वांर राइ रुई धरते
छोरे-छारे, छोरी-छ्पारी, जद भाभी-भुभी बोल्ले
मां-मू ,भाई-भुई ना बोलते आंनी तोल्ले
सुट-साट, पैंट-पुन्ट लुंगी-लांगी देखो
धोती-धाती, कुरता-कारता,गूंगी-गांगी देखो
अर हरियाणवी बोल्ल्निया संस्कृति का पुजारी स....डबलिंग हरियाणे की................
रिश्ते-राष्त्या का उरे जब जिक्र-जुकर चाल्ले
सुनके दुनिया का कालजा दो हाथ हाल्ले
ताई-तुई, काकी-कुकी,दादा-दुदा देखो
दादी-दूदी, भुवा-भावा, चाची - चूची देखो
बेबे-बाबे, जीजा-जाजा, बेटा-बाटा देखो
कहावता में आके फसरया, बिरला टाटा देखो
अर देखो कहण आल्ले क्यूकर भ्यानी-भुन्नी बोल्ले
बाल्टी-बुलटी,कुवां-कावां, पाणी-पूणी बोल्ले
खेत क्यार, नहर-नाहर, गेहूं-गांहू देखो
सब हरियाणे में घूम के अच्छी दाऊ देखो
पाओगे उरे भाईचारे की खेती क्यारी स.........डबलिंग हरियाणे की................
अफसर- उफसर, डाक्टर-दुकटर नर्स-नुर्स देखो
डिग्री-डागरी, पढ़ना-पुढ्ना, कोर्स- कुर्स   देखो
मास्टर-मुस्टर, मैडम-माडम, स्कूल- स्काल  देखो
हर शब्द की प्याज़ ज्यू  उतरती खाल देखो
देखो क्यूकर ब्याह-ब्यूह में नाचा- नुची  होरी
कूद-कूद के छड़े आंगन, के छोरा के छोरी
मंत्री मुन्त्री, एसपी-उस्पी, डीसी-डासी सारे
माहरी बोली, बोल बाल के चोगरदू के छारे
रामदेव के नुक्ते--नाकते दुनिया भर में देखो
हाज़िर जवाबी के मास्टर हरेक  घर में देखो
अर देखो चुटकलों की धरती मुस्कुरा री स.......डबलिंग बोली हरियाणे की ...........