दामण बावन गज का भारी मिले तो बतो दियो
किते वा सामण की खुमारी मिले तो बता दियो
बहुत लम्बे टेम त भाईओ मैं परेशान हो रह्य सूं
कोए संस्कृति का पुजारी मिले तो बता दियो
आप सभी का मेरी blogs पर स्वागत है,, प्लीज़ अपनी नजरे इनायत करके जरुर बताएं की मैं दिल की बात कहने में कहाँ तक सफल हुआ हूँ..| http://bechainkigazleblogspotcom.blogspot.com/2011/09/blog-post_17.html http://bechainkesher.blogspot.com/ http://vmbechain.blogspot.com/?zx=40fa6e9f43ea7230 http://bechainartical.blogspot.com/http://www.youtube.com/my_videos?ls=public
khas log
Thursday, 21 July 2011
दोस्तों आप लोगो को याद हो कई साल पहले अमेरिकी रास्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आये थे,, वे जब भारत आये तो उस फाग था,, याद दिला दू की जनाब दिल्ली आये और वह
हम बात देखते रहे ना हरियाने में आया
बैरी क्लिंटन न जाके जयपुर गुलाल उड़ाया
माहरा गोबर और कीचड़ धरा धराया रहग्या
ग्रीस गेल्या कला तेल दो मिनट में बह्ग्या
रंग कई ढाल के धर राखे थे
कोरडे तैयार कर राखे थे
पर हाथ त लिकडग्या,,, जाके दिल्ली बढग्या
नहीं तो बता देवा अर,,,, फाग हरियाने का चखा देवा अर
ठाके होदी में गेर देते,, थापी कोरडे के मन्त्र फेर देते
क्लिंटन न जीस्सा आ जाता ,, अगर भांग आल्ली कुल्फी खा जाता
व्याइट हॉउस भूल जावे अर , ज माहरे गाम में घूम आवे अर
अमेरिका बाट देखता,, ठा-ठा के न टांट देखता
माहरा रास्ट्रपति कोन्या आया,, देश का पति कोन्या आया
पर उनने के बेरा क्लिंटन न कित धूणा ला राख्या स
इबके उसने हरियाणे का फाग चाख्या स
कोरडे ज्यादा लागगे होंगे,,, साथ आवनिये भागगे होंगे
इब किसने बेरा बिचारा हरियाने में ही फस रह्य स
वो तो फाग आल्ले दिन त गार में धंस रह्य स
पर इसमें उसका के कसूर स
यो तो हरियाने का दस्तूर स
ठाके नाली में फेंक देवे स
क्लिंटन हो चाहे भाती,, लठा का चेक देवे स
सारी देई न लांबी कर देवे स
अर मार मार कोरडे पेटा सा भर देवे स
और फेर कहवे स होली स भाई होली स बुरा ना मनो होली स
बैरी क्लिंटन न जाके जयपुर गुलाल उड़ाया
माहरा गोबर और कीचड़ धरा धराया रहग्या
ग्रीस गेल्या कला तेल दो मिनट में बह्ग्या
रंग कई ढाल के धर राखे थे
कोरडे तैयार कर राखे थे
पर हाथ त लिकडग्या,,, जाके दिल्ली बढग्या
नहीं तो बता देवा अर,,,, फाग हरियाने का चखा देवा अर
ठाके होदी में गेर देते,, थापी कोरडे के मन्त्र फेर देते
क्लिंटन न जीस्सा आ जाता ,, अगर भांग आल्ली कुल्फी खा जाता
व्याइट हॉउस भूल जावे अर , ज माहरे गाम में घूम आवे अर
अमेरिका बाट देखता,, ठा-ठा के न टांट देखता
माहरा रास्ट्रपति कोन्या आया,, देश का पति कोन्या आया
पर उनने के बेरा क्लिंटन न कित धूणा ला राख्या स
इबके उसने हरियाणे का फाग चाख्या स
कोरडे ज्यादा लागगे होंगे,,, साथ आवनिये भागगे होंगे
इब किसने बेरा बिचारा हरियाने में ही फस रह्य स
वो तो फाग आल्ले दिन त गार में धंस रह्य स
पर इसमें उसका के कसूर स
यो तो हरियाने का दस्तूर स
ठाके नाली में फेंक देवे स
क्लिंटन हो चाहे भाती,, लठा का चेक देवे स
सारी देई न लांबी कर देवे स
अर मार मार कोरडे पेटा सा भर देवे स
और फेर कहवे स होली स भाई होली स बुरा ना मनो होली स
Monday, 18 July 2011
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
कौन बैठेगा भला आकर मुझ ठूंठ के नीचे
ना छाया देता हूँ, ना असर बहारो का है
खूब देख लिया घूम फिर के दुनिया में
ना कोए गमख्वार वक्त के मारो का है
गला घोंट दू यादों का नया घर बसा लूं
मुझसे ना होगा ये काम तो गदारो का है
वो तो गम की कैद में हूँ वरना देता
क्या मतलब आजकल तेरे इशारों का है
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
दिल जलाने में हाथ हलकी फुहारों का है
ना छाया देता हूँ, ना असर बहारो का है
खूब देख लिया घूम फिर के दुनिया में
ना कोए गमख्वार वक्त के मारो का है
गला घोंट दू यादों का नया घर बसा लूं
मुझसे ना होगा ये काम तो गदारो का है
वो तो गम की कैद में हूँ वरना देता
क्या मतलब आजकल तेरे इशारों का है
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
दिल जलाने में हाथ हलकी फुहारों का है
Saturday, 16 July 2011
पेश है बेरोज़रो के मन की बात
र नौकरी तेरे बिना तो डिग्री बराबाट होरी स
र कित सोवां, माहरी तो खड़ी खाट होरी स
होरया बिस्तर गोल देश में बेरोजगार भाईआ का
छोड़ी छाती छः फुट के, पर दिल रह रह्य स पाईया का
के कर लेवे तेरे रंज में देई त गिर रे स
अर हाय नौकरी हाय करते करते फिर रे स
के बेरा त सत्यानासन कितना और सतावेगी
बूढ़े होंगे धोले आगे कद तए तू ना थ्यावेगी
पढ़ते आणी सोची थी तैने आसानी त पाल्यंगे
दसमी करया पाछे तैने किते त भी ठाल्यांगे
पर फार्म भर-भर के न हम तो सारी दुनिया घूम आयें
हाय नौकरी तेरा ठिकाना किते भी ना टोह पाए
तेरे बिना तो जीना माहरा नर्क होरया स
भरी जवानी के म बेडा गर्क होरया स
अर तेरे बिना तो ब्याह शादी में आंट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
उम्र तीस की दिखे पचपन बिना नौकरी के यारो
जवानी त आछ्या लागे बचपन बिना नौकरी के यारो
अर बिना नौकरी रे-रे- माटी इसी होज्या स
जणु भरे रेत के आंगन में कोए सुई खोज्या स
अर होज्या स बर्बाद बुढ़ापा छोरे की हालत देख के
वो सिर पे कुण्डी ठाले स जद डिग्री-डागरी फेंक के
र बेकारी का इसते बड़ा कोए और उदाहरन के बतावे
बी ए ऍम ए पास छोरे आज देश में औटो चलावे
के कर लेवां तेरा नौकरी तेरी न्यारी श्यान स
बेकारी के मन्दिर में तू ए तो भगवान स
तू ए इब आबाद करेगी, तू ए देवेगी जिस्सा
तू ए दूर करे बेकारी, तू ए देवेगी पिस्सा
अर तू स जिसके धोरे जिंदगी ठाठ होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
खदरधारी के आंगन में तू गंगा बनके बहवे स
जाणा सां तू रिस्पतपुर के सिफारिस नगर में रहवे स
अर शक्ल में जिनके बारा बजरे, बोलन की तमीज़ कोन्या
कई इसे नौकरी कर रे स जो इंसानियत के बीज कोन्या
पांच मिनट के काम में दस-दस घंटे ला दे स
बाप की जागीर समझ के कुर्सी देश का धुम्मा ठा दे स
एक त मिलरी स उन न नौकरी, ना तो दिखे दिन में तारे
बेकारा की भीड़ में वे भी पावे किते तेरे मारे
बेकारी के दर्द का उनके दिल में जद अहसास होवे
तेरे कारण जगह-जगह पे उनका भी उपहास होवे
बेचैन नौकरी कईया न तो आज पकोड़े चाट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
र कित सोवां, माहरी तो खड़ी खाट होरी स
होरया बिस्तर गोल देश में बेरोजगार भाईआ का
छोड़ी छाती छः फुट के, पर दिल रह रह्य स पाईया का
के कर लेवे तेरे रंज में देई त गिर रे स
अर हाय नौकरी हाय करते करते फिर रे स
के बेरा त सत्यानासन कितना और सतावेगी
बूढ़े होंगे धोले आगे कद तए तू ना थ्यावेगी
पढ़ते आणी सोची थी तैने आसानी त पाल्यंगे
दसमी करया पाछे तैने किते त भी ठाल्यांगे
पर फार्म भर-भर के न हम तो सारी दुनिया घूम आयें
हाय नौकरी तेरा ठिकाना किते भी ना टोह पाए
तेरे बिना तो जीना माहरा नर्क होरया स
भरी जवानी के म बेडा गर्क होरया स
अर तेरे बिना तो ब्याह शादी में आंट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
उम्र तीस की दिखे पचपन बिना नौकरी के यारो
जवानी त आछ्या लागे बचपन बिना नौकरी के यारो
अर बिना नौकरी रे-रे- माटी इसी होज्या स
जणु भरे रेत के आंगन में कोए सुई खोज्या स
अर होज्या स बर्बाद बुढ़ापा छोरे की हालत देख के
वो सिर पे कुण्डी ठाले स जद डिग्री-डागरी फेंक के
र बेकारी का इसते बड़ा कोए और उदाहरन के बतावे
बी ए ऍम ए पास छोरे आज देश में औटो चलावे
के कर लेवां तेरा नौकरी तेरी न्यारी श्यान स
बेकारी के मन्दिर में तू ए तो भगवान स
तू ए इब आबाद करेगी, तू ए देवेगी जिस्सा
तू ए दूर करे बेकारी, तू ए देवेगी पिस्सा
अर तू स जिसके धोरे जिंदगी ठाठ होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
खदरधारी के आंगन में तू गंगा बनके बहवे स
जाणा सां तू रिस्पतपुर के सिफारिस नगर में रहवे स
अर शक्ल में जिनके बारा बजरे, बोलन की तमीज़ कोन्या
कई इसे नौकरी कर रे स जो इंसानियत के बीज कोन्या
पांच मिनट के काम में दस-दस घंटे ला दे स
बाप की जागीर समझ के कुर्सी देश का धुम्मा ठा दे स
एक त मिलरी स उन न नौकरी, ना तो दिखे दिन में तारे
बेकारा की भीड़ में वे भी पावे किते तेरे मारे
बेकारी के दर्द का उनके दिल में जद अहसास होवे
तेरे कारण जगह-जगह पे उनका भी उपहास होवे
बेचैन नौकरी कईया न तो आज पकोड़े चाट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
Friday, 15 July 2011
मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…
एक बान्दर एक बान्दरी से बोल्या मैं हुक्का पी आऊं । बान्दरी बोल्ली जा पिया। वह हुक्का पियण चला गया तो वहां चार पांच आदमी बैठे थे और उन्होने चिलम झाड राखी थी। बन्दर जा कर उस चिलम के ऊपर बैठ गया । चिलम में बिरहड बैठी थी वा उसकै लड गई। बन्दर तो वहां से उछलता हुआ बान्दरी के पास आया……..... .बान्दरी बोल्ली हुक्का पी आया…….?
बांदर बोल्या……हु क्का के पिया……..मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…
चाइनीज काटडी
राकेश खूंढ़े की चाह की दूकान फेल होगी | तो उहने महम आले मेले में २०-२५ काटडी बाँध ली बेचन खातर |
जीतू मान-- आं भाई काटडी कितने की दी ?
राकेश खूंढा -- ५०० रापियाँ की |
जीतू मान -- इन्नी सस्ती क्यूकर ?
राकेश खूंढा--- चाइनीज सें |आड़े तो रिंगा के दिखा दयुन्गा अर जा घरां जा कें भोंसन्न लागी तो गारंटी ना स |
Thursday, 14 July 2011
आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई
रमलू के पड़ौस में एक नई बहू आई थी । रमलू हुक्के की चिलम भरण का ओडा (बहाना) ले कै रोज उस घर में चला जाया करता । कुछ दिन पाच्छै बहू आपणै पीहर चली गई, रमलू नै इस बात का बेरा ना था ।
रमलू चिलम ले कै पहुंच ग्या अर इंघे-उंघे नै देख कै बुढ़िया तैं बोल्या - ताई, आग सै ?
ताई बोली - बेटा, आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई !!
रमलू चिलम ले कै पहुंच ग्या अर इंघे-उंघे नै देख कै बुढ़िया तैं बोल्या - ताई, आग सै ?
ताई बोली - बेटा, आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई !!
बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी
एक नया रंग
बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी
बात मेरी याद सदा राखियों छोरयो
ईट का जवाब पत्थर गेल मिलेगा
छोटे कानी हाथ ना बाँकियो छोरयो
नशा करे नाश देई और पिस्स्या का
धुम्मा दारू कदे भी ना चाखियो छोरयो
बुढ़ापे तक थारा पक्का साथ देवेगी
बात बड़े-बुढया की हांकियो छोरयो
शेर न सदा ए सवा शेर मिल्या स
भूल के भी एंडी ना पाकिओ छोरयो
इश्क में बेचैन नहीं होणा पड़ेगा
महबूब आगे गप्पे ना हाकियो छोरयो
---- वी एम् बेचैन, भिवानी
मोबाइल नम्बर 9315373754 9034741834
बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी
बात मेरी याद सदा राखियों छोरयो
ईट का जवाब पत्थर गेल मिलेगा
छोटे कानी हाथ ना बाँकियो छोरयो
नशा करे नाश देई और पिस्स्या का
धुम्मा दारू कदे भी ना चाखियो छोरयो
बुढ़ापे तक थारा पक्का साथ देवेगी
बात बड़े-बुढया की हांकियो छोरयो
शेर न सदा ए सवा शेर मिल्या स
भूल के भी एंडी ना पाकिओ छोरयो
इश्क में बेचैन नहीं होणा पड़ेगा
महबूब आगे गप्पे ना हाकियो छोरयो
---- वी एम् बेचैन, भिवानी
मोबाइल नम्बर 9315373754 9034741834
Wednesday, 13 July 2011
देश में जद भी देश भक्ति का जिक्र उठता है तो माहरा ध्यान पाकिस्तान की तरफ चल्या जावे स ..सोचन की बात स के पाकिस्तान नहीं होता तो के हम देश भक्त नहीं होते,, ऐसा नहीं है सच्चाई ये स अक हम देश भक्त ए होते तो पाकिस्तान कोन्या होता,,, देशवासिया की देशभक्ति न ध्यान में रखते होए हरियाणवी जोश की एक कविता,,,, मान ज्यां पाकिस्तान
तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
मिंटा में हुलिया बिगड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
घर की देई ना हो जिसकी वे लड्या नहीं करते
अर शेरां की बस्ती में कुते बड्या नहीं करते
फेर के सोच के सरहद पे तू लिकड़े तोड़े स
अर उग्रवाद के कुते माहरे कानी मोड़े स
एक बात पते की कह रह्य सू, सुन ले पाकिस्तान
इरादे थारे न्यू छड़ागे, जणू छड़ा सां धान
तू गौरी मिसाएल लेके बेशक पहाडा उप्पर बैठ
तेरे लगेंगे जद उलटे सीधे, लिकड जावेगी ऐठ
हिमायती तेरे तैने पिछानन त मना कर देंगे
जिस दिन हिन्दुस्तानी तेरी सोढ़ भर देंगे
फेर रोवेंगा माथे पर धरके हाथ बेटा तू
सोचेगा लिकड़ा सूँ, मैं इतना सपरेटा क्यू
सारा तेरा नशा झडेगा मान ज्यां पाकिस्तान ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
इतनी जल्दी कारगिल आल्ली मार भूलगया तू
हिदुस्तानी तिल की तेज़ धार भूलगया तू
बहोत निकम्मा बहोत घटिया बहोत पिटाउ तू
र पाकिस्तान तेरी हरकत न किसकी संघ्या दू
जान बुझ के मौत न मौसी कहणा छोड़ दयो
धरती त खू जाओगे नशे में रहणा छोड़ दयो
गुस्से में ना ल्याओ थारी हम रेल बणा दयांगे
पाकिस्तानी लीडरा खातर जेल बणा दयांगे
अर बिछा के कम्बल गेर के मुदा खाल तार दयांगे
परमाणु के कीड़े थारे तुरंत मार दयांगे
भारतीया की ताक़त का अंदाज़ा कोन्या थमने
गेंद त ज्यादा ना समझा हम सरफिरे बम न
पर बम थार थमने राग्डेगा मान ज्या पाकिस्तान --- ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
बात छोटी सी समझ सके तो समझ ले पाकिस्तान
कित स तेरी जनसंख्या अर कित स हिंदुस्तान
तेरी टांग तोड़ के लंगड़ा कर दयां, आँख फोड़ के काणा
अर तेरे उप्पर तो एकला यो भारी पड़े हरियाणा
अर एक एक हिन्दुस्तानी ज लघु शंका करण लागे
बढ़ आज्या पाकिस्तान में, लिकड के सारे भागे
अपना ए इतिहास आज तू खुद उठा के देख
कितनी बार पीटा स, मन में बात बिठा के देख
पर तू ---- पीटन का कोर्स करे स मैंने लागे पाकिस्तान
पार ठेका कोन्या लेवे तेरा इबके हिंदुस्तान
बहुत बड़ी स दुनिया टक्कर मार किते भी जा
के लेना स तेरे त हमने, बेशक गोबर खा
तू ज्यादा देर नहीं अक्डेगा मान ज्यां पाकिस्तान,,,,, ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
मिंटा में हुलिया बिगड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
घर की देई ना हो जिसकी वे लड्या नहीं करते
अर शेरां की बस्ती में कुते बड्या नहीं करते
फेर के सोच के सरहद पे तू लिकड़े तोड़े स
अर उग्रवाद के कुते माहरे कानी मोड़े स
एक बात पते की कह रह्य सू, सुन ले पाकिस्तान
इरादे थारे न्यू छड़ागे, जणू छड़ा सां धान
तू गौरी मिसाएल लेके बेशक पहाडा उप्पर बैठ
तेरे लगेंगे जद उलटे सीधे, लिकड जावेगी ऐठ
हिमायती तेरे तैने पिछानन त मना कर देंगे
जिस दिन हिन्दुस्तानी तेरी सोढ़ भर देंगे
फेर रोवेंगा माथे पर धरके हाथ बेटा तू
सोचेगा लिकड़ा सूँ, मैं इतना सपरेटा क्यू
सारा तेरा नशा झडेगा मान ज्यां पाकिस्तान ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
इतनी जल्दी कारगिल आल्ली मार भूलगया तू
हिदुस्तानी तिल की तेज़ धार भूलगया तू
बहोत निकम्मा बहोत घटिया बहोत पिटाउ तू
र पाकिस्तान तेरी हरकत न किसकी संघ्या दू
जान बुझ के मौत न मौसी कहणा छोड़ दयो
धरती त खू जाओगे नशे में रहणा छोड़ दयो
गुस्से में ना ल्याओ थारी हम रेल बणा दयांगे
पाकिस्तानी लीडरा खातर जेल बणा दयांगे
अर बिछा के कम्बल गेर के मुदा खाल तार दयांगे
परमाणु के कीड़े थारे तुरंत मार दयांगे
भारतीया की ताक़त का अंदाज़ा कोन्या थमने
गेंद त ज्यादा ना समझा हम सरफिरे बम न
पर बम थार थमने राग्डेगा मान ज्या पाकिस्तान --- ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
बात छोटी सी समझ सके तो समझ ले पाकिस्तान
कित स तेरी जनसंख्या अर कित स हिंदुस्तान
तेरी टांग तोड़ के लंगड़ा कर दयां, आँख फोड़ के काणा
अर तेरे उप्पर तो एकला यो भारी पड़े हरियाणा
अर एक एक हिन्दुस्तानी ज लघु शंका करण लागे
बढ़ आज्या पाकिस्तान में, लिकड के सारे भागे
अपना ए इतिहास आज तू खुद उठा के देख
कितनी बार पीटा स, मन में बात बिठा के देख
पर तू ---- पीटन का कोर्स करे स मैंने लागे पाकिस्तान
पार ठेका कोन्या लेवे तेरा इबके हिंदुस्तान
बहुत बड़ी स दुनिया टक्कर मार किते भी जा
के लेना स तेरे त हमने, बेशक गोबर खा
तू ज्यादा देर नहीं अक्डेगा मान ज्यां पाकिस्तान,,,,, ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
भाईओ इस गीत न गाके मुख्यमंत्री तक पहुचा दयो,,, शायद बात बन जावे और दुआ करो कामयाबी मिले मैं अगले हफ्ते त भाषा बनान के खातर हस्ताक्षर अभियान छेड़ रह्य सू,,, आप लोगो की मदद की जरूरत पड़ेगी ---------वींएम् बेचैन -९३१`५३७३७५४
माहरी बोली न भाषा बणा दयो एक ब आप हुड्डा जी
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........
राजस्थानी गुजराती अर पंजाबी न देखो थम
कर रे सारे खूब तरक्की भाषा आल्ला लेके बम
माहरी तोप बरगी बोली थमने कित त लागे स या कम
माहरी छाती उप्पर त ठा दयो यो सांप हुड्डा जी ,,,,,,,,,,,फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप---
माहरी बोली भाषा बनगी तो फेर खूब जिस्सा आज्यागा
बिखरा होया सारा साहित्य एक ए जगह पाज्यागा
दुनिया भर में हरियाने का बच्चा-बच्चा छाज्यागा
हाँ चाँद तेई का ले दयांगे हम नाप हुड्डा जी----------फेर कट जावेंगे-----------------
जब--जब आया एक नवम्बर तब तब बांधी हमने आस
शायद हुड्डा जी कर देवे बोली खातर किम्मे ख़ास
हाय रे किस्मत सारया की न्यू ए अटक रही स साँस
माहरी अटकी सांस का कर दयो कोए जाप हुड्डा जी.........फेर कट जावेंगे हरियाणे के -----
युगां-युगां तक सीएम जी थारा नाम अमर हो जावेगा
भाषा आल्ला तुर्रा जिस दिन सिर तेरे बंध जावेगा
दुनिया भर में हरियाने का नाम चमकता पावेगा
भाषा बणन की ला दयो एक ब थाप हुड्डा जी------------
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........
राजस्थानी गुजराती अर पंजाबी न देखो थम
कर रे सारे खूब तरक्की भाषा आल्ला लेके बम
माहरी तोप बरगी बोली थमने कित त लागे स या कम
माहरी छाती उप्पर त ठा दयो यो सांप हुड्डा जी ,,,,,,,,,,,फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप---
माहरी बोली भाषा बनगी तो फेर खूब जिस्सा आज्यागा
बिखरा होया सारा साहित्य एक ए जगह पाज्यागा
दुनिया भर में हरियाने का बच्चा-बच्चा छाज्यागा
हाँ चाँद तेई का ले दयांगे हम नाप हुड्डा जी----------फेर कट जावेंगे-----------------
जब--जब आया एक नवम्बर तब तब बांधी हमने आस
शायद हुड्डा जी कर देवे बोली खातर किम्मे ख़ास
हाय रे किस्मत सारया की न्यू ए अटक रही स साँस
माहरी अटकी सांस का कर दयो कोए जाप हुड्डा जी.........फेर कट जावेंगे हरियाणे के -----
युगां-युगां तक सीएम जी थारा नाम अमर हो जावेगा
भाषा आल्ला तुर्रा जिस दिन सिर तेरे बंध जावेगा
दुनिया भर में हरियाने का नाम चमकता पावेगा
भाषा बणन की ला दयो एक ब थाप हुड्डा जी------------
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........
Subscribe to:
Posts (Atom)