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Monday, 23 April 2012

फफेड दयूंगा

धरके एडी बहम थारे सब उखेड दयूंगा
मतन्या एंडी पाको ना तो फफेड दयूंगा

लाल मिर्च सा लडूंगा तीखा मैं बैरीया क
मन भिर्डा के छत्ते न जब भी छेड़ दयूंगा

ज्ञान घणा सा झाडेगा जो कोए बढ़कर
उसकी अक्ल के दरवाजे मैं भेड़ दयूंगा 

कितणी ए खिलाफत करलो मेरे बारे में
एक दिन करी कराई पै पाणी गेड दयूंगा

कुछ वक्त की यात्ता होई कुछ माडे हालात
कद सोची थी बेचैन दिल में तरेड दयूंगा

आज चुप थोड़े रहूँगा


मौका लाग्या सै आज चुप थोड़े रहूँगा
चाहे हो किसे कै खाज चुप थोड़े रहूँगा

मन की भडास सारी ए लिकाड़ दयूंगा
चाहे बुरा मानो समाज चुप थोड़े रहूँगा

अच्छे और बुरे की सब समझ आवे स
मैं भी खाऊं सूं अनाज चुप थोड़े रहूँगा

पैरां त पैदल सूं मगर दिमाग त नही
जब खुलग्या सै राज़ चुप थोड़े रहूँगा

मेरी शराफत उननै कमजोरी लागे सै
बणना पड़ेगा बेल्याज़ चुप थोड़े रहूँगा
क्यूकर जतावेगा वो अहसान मदद का
मैंने दे राख्या सै ब्याज चुप थोड़े रहूँगा

बेशक देर सवेर करूं दुश्मना का बेचैन
करके छोड़ना सै इलाज़ चुप थोड़े रहूँगा

देके हजार रपिये किराया जोश में रह ल्यांगे


देके हजार रपिये किराया जोश में रह ल्यांगे
उसके दिल में ना रहे तो पडोस में रह ल्यांगे

मिल्या करेगी नजर फेर रोजाना आपस में
वा बात नही करेगी तो हम रोष में रह ल्यांगे

जद तै सुणी बाप उसका थानेदार बणग्या सै
कदे भीतर करवा दे थोडा होश में रह ल्यांगे

वा पूरा डोसा खाग्गी तो के जी लिकडग्या माहरा
वा राज्जी रहियो हम तो सोस में रह ल्यांगे

होज्यागी रिश्तेदारी फेर गली के सब छोर्या तै
थारा जीजा लाग्गू सूँ इस धोंस में रह ल्यांगे


दे देगा अपणे सारे सोड-सोडिये बेचैन उसनै
जाड़े की भरी रात में भी ओंस में रह ल्यांगे

दिल कभी ले लिए सस्ते रेट दयूंगा


ओरिजनल नही फोटो स्टेट दयूंगा
दिल कभी ले लिए सस्ते रेट दयूंगा

शाहजहाँ नै तो बस ताज ए दिया था
तू मर मेरे खातिर इंडिया गेट दयूंगा

शक नही करूंगा तेरी किसी बात पै
बेझिझक बोल झूठ सब लपेट दयूंगा

दो घड़ी तो बैठ तू मेरे पास कभी
बहम तेरे मैं सब के सब मेट दयूंगा

आवण दे इबके वेलेनटाइन डे बेचैन
तैने गिफ्ट में हरियाणा स्टेट दयूंगा

Saturday, 21 April 2012

इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां

एक बै लिलू अर धारा आहते मै बैठे पीण लाग रे
लिलू - भाई धारे आज तै इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां
आहते आला आया अर बोल्या - अरै कमिनों, श्यामी एक ए पेड सै, ईब के य्हाडै जंगल बणाओगे...?

मेरा छह मिह्न्या में छह किलो वजन घटा दि


ना पूछ तेरे प्यार नै किसाक धुम्मा ठा दिया
मेरा छह मिह्न्या में छह किलो वजन घटा दिया

शुक्र सै थोडा जिम ज्वाइन कर राख्या सै मैंने
तैंने खून फेर भी मेरा अच्छा अच्छा सूखा दिया

क्यूं फेर भी बात करण में तेरा जी नही करता
 नोकिया तक का तेरे तै मोबाइल दुवा दिया

मैं इस्ते ज्यादा बता और के करू भागवान
कालीन की ज्यूं आगे तेरे कालजा बिछा दिया

इससे ज्यादा खराब माट्टी के होवेगी बेचैन
तैने देशी छोरा एकदम सपरेटा बणा दिया

Friday, 20 April 2012

होता गर मैं गलती तै दुधिया मेरी जान




होता गर मैं गलती तै दुधिया मेरी जान
तुझे किलो दूध फालतू मैं रोजाना देता

शुक्र सै कोन्या मेरी परचून की दूकान
नही सारा सौदा फ्री में तेरा दीवाना देता

न्यू भी लड्डू सा भुरभुरा स्वभाव सै मेरा
कितना ए फोड़ के खा ना उल्हाना देता

मैं बेशक तै बेचता एक्सपाइरी सामान
पर तैंने कदे भी नही माल पुराना देता

इसकी मौज सै इसके यार कै कारण
 फेर तो पूरा गाम तैंने यो ताना देता

तेरे हिस्से की लामणी भी मैं कर देता
वक्त गर साथ काम करण का बहाना देता

बेचैन होकर करता मैं इतनी चाकरी
मिसाल मेरी मेरे बाद यो जमाना देता

Saturday, 17 March 2012

जा अचार घाल लिए अपणे दिल का

राह गलत इश्क की मैं नादान पकड़ बैठ्या
एक बावळी गादड़ी के कान पकड़ बैठ्या

ईब कुछ समझ नही आ रह्या के करूं आखिर
क्यूं मैं अपनी मौत का सामान पकड़ बैठ्या

मैं ठहरा बंदर भला के जाणु अदरक का स्वाद
दही समझ कपास का खलिहान पकड़ बैठ्या

अक्सर तबियत खराब रहण का यो कारण सै
बदले में दिल न मिलण का नुकसान पकड़ बैठ्या

जा अचार घाल लिए अपणे दिल का बेचैन
गलती होगी तन्ने मेरी जान पकड़ बैठ्या














Thursday, 15 March 2012

मत सोचिये मैं गुजरा होया दौर होग्या सूं

ना पूछ इश्क में कितणा कमजोर होग्या सूं
आजकल साँस लेवण का भी चोर होग्या सूं

पहल्या सी बात मेरे में किसे नै ना दिखती
दोस्त कहरे सै मैं तो कुछ और होग्या सूं

तू ख्यालों में आके लगा ले बाता में
मैं तो पड्या-पड्या कमरे में बोर होग्या सूं

जद आवे मेरी याद आवाज़ देके बुला लिए
मत सोचिये मैं गुजरा होया दौर होग्या सूं

सिर्फ एक बार बोल फेर नही पूछेगा बेचैन
अगर सच्ची तेरे कलेजे की कोर होग्या सूं

Wednesday, 14 March 2012

इन दिनों लुगाई नाराज चाल री सै

इन दिनों लुगाई नाराज चाल री सै
बेरा नै उसके कित खाज चाल री सै

पहल्या तो देख लिया करती मुस्कुराके
आजकाल गुस्से में बेल्याज़ चाल री सै

वा न्यू लिकाडै सै बात के कई मतलब
बोली नजर थारी दगाबाज़ चाल री सै

इलाज़ तो मन्ने भी कुछ करना पड़ेगा
वा ज्यादा ए खाके अनाज चाल री सै

कसूर कोन्या उसकी सोच में बेचैन
पतियों की फौज दगाबाज़ चाल री सै