khas log

Sunday, 15 January 2012

मुस्कुराके बोलण का तू खूब ए फायदा लेरी सै


इन दिनां तू प्यार कम मेरे स्वाद ज्यादा लेरी सै
जाणग्या बस खाट खड़ी करण का इरादा लेरी सै

मेरे भीतर का शक तेरे त बार बार न्यू पूछे स
किसके साथ मेरा धुम्मा ठावण का वादा लेरी सै

अपणा कसूर सर पै मेरे जद चाहवे धर दे सै
मुस्कुराके बोलण का तू खूब ए फायदा लेरी सै

क्दे क्दे तो तू महबूबा त मेरी माँ बणज्या सै
समझ नही पा रहया सू यो के इरादा लेरी सै

सबके बसकी ना होवे सै किसे की याद में रोणा
जाणे सै बेचैन तू आँख में जिसा कादा लेरी सै

Friday, 6 January 2012

जाट के आगे भुत भी नाचे सै

एक बारी, एक जाट नें शमशानघाट में हल जोड़ दिया भूत किते बाहर जा रह्या था. भूतनी जाट न डरावन खातर कांव कांव करण लागी. पर जाट ने कोई परवाह कोणी करी. आख़िर भूतनी बोली “तू यो के करह सै” जाट बोल्या “में उरे बाजरा बोवुंगा” भूतनी बोली “हम कित रहंगे” जाट बोल्या “मनें ठेका नि ले राख्या. भूतनी बोली “तू म्हारे घर का नास मत करै, हाम तेरे घर में 100 मण बाजरा भिजवा दयांगे”. जाट बोल्या “ठीक सै लेकिन तड़की पूंचना चाहिए नि तो में आके फेर हल जोड़ द्यूंगा” शाम नै भुत घर आया तो भूतनी बोली आज तो नास होग्या था. न्यूं न्यूं बणी अर जाट 100 मण बाजरे में मसाए मान्या. भुत ने भोत गुस्सा आया और बोल्या तने क्यों ओट्टी, मन्ने इसे जाट भोत देखे सै. मन्ने उसका घर बता में उसने इब सीधा कर दयुन्गा. अर भुत जाट कै घर चल्या गया. जाट कै घर में एक बिल्ली हील री थी. वा रोज आके दूध पी जाया करदी. जाट नै खिड़की में एक सिकंजा लगा लिया और रस्सी पकड़ के बैठ ग्या अक आज बिल्ली आवेगी और मैं उसने पकडूँगा. भुत नै सोची तू खिड़की मैं बड़के जाट ने डरा दे. वो भीतर नै सीर करके खुर्र-खुर्र करण लाग्या आर जाट नै सोची – बिल्ली आगी. उसने फट रस्सी खिंची आर भुत की नाड़ सिकंजा मैं फस गी आर वो चिर्र्र – चिर्र्र करण लाग ग्या. जाट बोल्या रै तू कोण सै ? वो बोल्या मैं भुत सूं. जाट बोल्या उरै के करे सै ? भुत बोल्या “मैं तो न्यू बुझंन आया था एके तू 100 मण बाजरे मैं मान ज्यागा अके पूली भी साथै भिजवानी सै? ठीक कही सै – जाट के आगे भुत भी नाचे सै

मर जायेगी पर किसी गरीब के काम ना आयेगी ...

 भिखारी ...एक लङकी से

क्या तुम मुझ से शादी करोगी !

लङकी ...शक्ल देखी है अपनी आईने मेँ
तुम से शादी करने से अच्छा तो मेँ फांसी पर लटक जाऊँ

भिखारी ...हे राम ,मर जायेगी पर किसी गरीब के काम ना आयेगी ...

झूठ पकड़ने वाला रोबोट

एक आदमी झूठ पकड़ने वाला रोबोट
खरीद कर लाया जो आदमी को झूठ
बोलने पर थप्पड़ मारता था उसने रात
के खाने के समय पर इसका परीक्षण
करने की सोची!बाप: बेटा, आज तुम स्कूल के समय पर कहाँ थे?बेटा: स्कूल में ही था पापा!
रोबोट ने बच्चे को थप्पड़ मार दिया!बेटा: बताता हूँ!
दोस्त के साथ डी.वी.डी पर पिक्चर देख रहा था!बाप:
कौन सी?बेटा: कुंग -फु -पंडा!रोबोट ने फिर से बच्चे
को थप्पड़ मार दिया!बेटा: ठीक है बताता हूँ, ये एक
अश्लील पिक्चर थी!बाप: क्या? जब मैं तुम्हारी उम्र का था तो मुझे पता भी नहीं था की ऐसी पिक्चर
भी होती है! रोबोट ने बाप को एक थप्पड़ मार दिया!माँ:
हा हा हा कर हंसने लगी, आख़िरकार बेटा तो ये
तुम्हारा ही है न!और रोबोट ने माँ को थप्पड़ मार दिया

क्यूं इसकी के आंख दुखणी आ री है।

हरियाणा में जब एक कंडक्टर ने बकाया राशि देते हुए एक गला हुआ सा दस का नोट किसी सवारी को दिया
तो सवारी बोली - ये नोट बदल दो।

उसकी बात सुनकर कंडक्टर ने ताना मारा -
क्यूं इसकी के आंख दुखणी आ री है।

Thursday, 5 January 2012

आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

दर्द नै सहणा तो दवाई सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

जन्मजात नही होता कोए खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई सिखावे सै

शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई सिखावे सै

जिनका वास्ता पड्या सै वे जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई सिखावे सै

तेरे साथ नै तो सदा बेचैन करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई सिखावे सै

Saturday, 26 November 2011

उसते बड़ा कपूत कौण होवेगा

दिल के मामले में मात खाग्या
हमने तो म्हारा ज़ज्बात खाग्या

गाम नै तो बख्श दिया था हक
पर रिश्तेदार हाथों हाथ खाग्या

इतणा चालाक लिकडया महबूब
मिलते ही काम की बात खाग्या

उसते बड़ा कपूत कौण होवेगा
जो बेटा बाप की खुबात खाग्या

हद की भी हद होवे सै बेचैन
वो कैसे अपणी औकात खाग्या

झूठ का धंधा बकवास होवे सै

नाश करणिया का नाश होवे सै
झूठ का धंधा बकवास होवे सै

मेहनती अर इमानदार सै जो
जीत की उसे तै आस होवे सै 

जद तै बसंती नै जींस पहरी सै
पप्पू भी लगातार पास होवे सै

सै पलक पै जिसके लोभ का बाळ
दौलत उसकी ए दास होवे सै

साजिस अच्छी वो रचेगा बेचैन
माणस जो अपना ख़ास होवे सै 

Wednesday, 16 November 2011

इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां

एक बै लिलू अर धारा आहते मै बैठे पीण लाग रे
लिलू - भाई धारे आज तै इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां
आहते आला आया अर बोल्या - अरै कमिनों, श्यामी एक ए पेड सै, ईब के य्हाडै जंगल बणाओगे...?

Saturday, 12 November 2011

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी
दो कौफी में लम्बी मुलाक़ात होया करेगी

स्वेटर जाकेट पहर के मैं भी मोटा दिखूंगा
मेरी कमजोरी पर ना इब बात होया करेगी

कितनी ए कॉफ़ी पी ले, वा सहेलियां कै संग
ना बिल नै लेके कोए खड़ी खाट होया करेगी

दिसम्बर जनवरी में जद भी बैठांगे पार्क में
गुनगुनाती धुप भी माहरे साथ होया करेगी

हाथ पकड़ के चालांगे तो किसे ना दिखांगे
जद बेचैन धुंध आल्ली बरसात होया करेगी