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Wednesday, 13 July 2011

देश में जद भी देश भक्ति का जिक्र उठता है तो माहरा ध्यान पाकिस्तान की तरफ चल्या जावे स ..सोचन की बात स के पाकिस्तान नहीं होता तो के हम देश भक्त नहीं होते,, ऐसा नहीं है सच्चाई ये स अक हम देश भक्त ए होते तो पाकिस्तान कोन्या होता,,, देशवासिया की देशभक्ति न ध्यान में रखते होए हरियाणवी जोश की एक कविता,,,, मान ज्यां पाकिस्तान

तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
मिंटा में हुलिया बिगड़ेगा मान ज्यां पाकिस्तान
घर की देई ना हो जिसकी वे लड्या नहीं करते
अर शेरां की बस्ती में कुते बड्या नहीं करते
फेर के सोच के सरहद पे तू लिकड़े तोड़े स
अर उग्रवाद के कुते माहरे कानी मोड़े स
एक बात पते की कह रह्य सू, सुन ले पाकिस्तान
इरादे थारे न्यू छड़ागे, जणू छड़ा सां धान
तू गौरी मिसाएल  लेके बेशक पहाडा उप्पर बैठ
तेरे लगेंगे जद उलटे सीधे, लिकड जावेगी ऐठ
हिमायती तेरे तैने पिछानन त मना कर देंगे
जिस दिन हिन्दुस्तानी तेरी सोढ़ भर देंगे
फेर रोवेंगा माथे पर धरके हाथ बेटा तू
सोचेगा लिकड़ा सूँ, मैं इतना सपरेटा क्यू
सारा तेरा नशा झडेगा मान ज्यां पाकिस्तान ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
इतनी जल्दी कारगिल आल्ली मार भूलगया तू
हिदुस्तानी तिल की तेज़ धार भूलगया तू
बहोत निकम्मा बहोत घटिया बहोत पिटाउ तू
र पाकिस्तान तेरी हरकत न किसकी संघ्या दू
जान बुझ के मौत न मौसी कहणा छोड़ दयो
धरती त खू जाओगे नशे में रहणा छोड़ दयो
गुस्से में ना ल्याओ थारी हम रेल बणा दयांगे
पाकिस्तानी लीडरा खातर जेल बणा दयांगे
अर बिछा के कम्बल गेर के मुदा खाल तार दयांगे
परमाणु के कीड़े थारे तुरंत मार दयांगे
भारतीया की ताक़त का अंदाज़ा कोन्या थमने
गेंद त ज्यादा ना समझा हम सरफिरे बम न
पर बम थार थमने राग्डेगा मान ज्या पाकिस्तान --- ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा
बात छोटी सी समझ सके तो समझ ले पाकिस्तान
कित स तेरी जनसंख्या अर कित स हिंदुस्तान
तेरी टांग तोड़ के लंगड़ा कर दयां, आँख फोड़ के काणा
अर तेरे उप्पर तो एकला यो भारी पड़े हरियाणा
अर एक एक हिन्दुस्तानी ज लघु शंका करण लागे
बढ़ आज्या पाकिस्तान में, लिकड के सारे भागे
अपना ए इतिहास आज तू खुद उठा के देख
कितनी बार पीटा स, मन में बात बिठा के देख
पर तू ---- पीटन का कोर्स करे स मैंने लागे पाकिस्तान
पार ठेका कोन्या लेवे तेरा इबके हिंदुस्तान
बहुत बड़ी स दुनिया टक्कर मार किते भी जा
के लेना स तेरे त हमने, बेशक गोबर खा
तू ज्यादा देर नहीं अक्डेगा मान ज्यां पाकिस्तान,,,,, ----------तेरा थप्पड़ गेल्या जी लिकड़ेगा

भाईओ इस गीत न गाके मुख्यमंत्री तक पहुचा दयो,,, शायद बात बन जावे और दुआ करो कामयाबी मिले मैं अगले हफ्ते त भाषा बनान के खातर हस्ताक्षर अभियान छेड़ रह्य सू,,, आप लोगो की मदद की जरूरत पड़ेगी ---------वींएम् बेचैन -९३१`५३७३७५४

माहरी बोली न भाषा बणा दयो एक ब आप हुड्डा जी
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप  हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........

राजस्थानी गुजराती अर पंजाबी न देखो थम
 कर रे सारे खूब तरक्की भाषा आल्ला लेके बम
माहरी तोप बरगी बोली थमने कित त लागे स या कम
माहरी छाती उप्पर त ठा दयो यो सांप हुड्डा जी ,,,,,,,,,,,फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप---

माहरी बोली भाषा बनगी तो फेर खूब जिस्सा आज्यागा
बिखरा होया सारा साहित्य एक ए जगह पाज्यागा
दुनिया भर में हरियाने का बच्चा-बच्चा  छाज्यागा
हाँ  चाँद तेई का ले दयांगे हम नाप हुड्डा जी----------फेर कट जावेंगे-----------------

जब--जब आया एक नवम्बर तब तब बांधी हमने आस
शायद हुड्डा जी कर देवे बोली खातर किम्मे ख़ास
हाय रे किस्मत सारया की न्यू ए अटक रही स साँस
माहरी अटकी सांस का कर दयो कोए जाप हुड्डा जी.........फेर कट जावेंगे हरियाणे के -----

युगां-युगां तक सीएम जी थारा नाम अमर हो जावेगा
भाषा आल्ला तुर्रा जिस दिन सिर तेरे बंध जावेगा
दुनिया भर में हरियाने का नाम चमकता पावेगा

भाषा बणन की ला दयो एक ब थाप हुड्डा जी------------
फेर कट जावेंगे हरियाणे के पाप  हुड्डा जी..............माहरी बोली न .........

Saturday, 9 July 2011

बिल उसने दिया

मैं जद भी गया रेस्टोरेंट बिल उसने दिया
ऑटो का आया जो भी रेंट बिल उसने दिया
वा सैन्डल लेवण गई तो मुझे बूट दुवा ल्याई
खरीदी मैंने जो भी पैंट बिल उसने दिया
कपडे प्रेस करान की भी दुकान बता राखी थी
छः महीन्या तक परमानेंट बिल उसने दिया
जो भी चीज़ पसंद आई यारां न गिफ्ट सेंटर म्ह
पंजी तक का सैंट परसेंट बिल उसने दिया
बेचैन बरगा प्यार भगवान दुश्मन न भी दे
कपड्या प छिडक्या जो भी सैंट बिल उसने दिया

ना चाहते हुवे भी नाम तेरा लेता है बेचैन



तुझे हंसने से फुर्सत न थी मुझे बेबसी से
फिर कैसे तार्रुफ़ करवाता तेरा जिंदगी से
कुछ भी ख्याल न आया मेरी हालत का तुझे
मुह छुपा कर रोता रहा मैं बैठा बेबसी से
क्यों नहीं समझते महोब्बत के तुम उसूल
दर्दे-दिल नहीं कहा जाता हर किसी से
मेरे जज्बात ना समझकर गजब किया तुने
अब जीता हूँ ना मरता हूँ अपनी ख़ुशी से
तुने जिस रोज़ से बुझाया उम्मीद का चिराग
रिश्ता सा कट गया मेरा हसरतो की रोशनी से
ना चाहते हुवे भी नाम तेरा लेता है बेचैन
क्यों कर दिया तुने आखिर लाचार जी से

र राजू प्यार ना करिए,

र राजू प्यार ना करिए, कोए देई बढ़ा देगा
किसी के कान ना भरिये कोए देई बढ़ा देगा
खाण कमाण ज्योगा ना छोड़ेगा इश्क तैने
दिल के चक्कर में ना पड़िए कोए देई बढ़ा देगा
खेतां में जावे तो गंडा पाड के बाहर होइए
भरोटी बांध कर ना धरिये कोए देई बढ़ा देगा
इश्क में भी मेहनत करेगा तो ठीक रहवेगा
माल हराम का ना चरिये कोए देई बढ़ा देगा
इन बुज़ुर्गा में त ए लिकड़ी स या जवानी
पहलवान ज्यादा ना स्वंरिये कोए देई बढ़ा देगा
आज पल्ले गांठ मार ले या बात मेरी बेचैन
किसे क टाबरा प ना मरिये कोए देई बढ़ा देगा

Friday, 8 July 2011

लो भाईओ हरियाणवी बोली की वा विशेषता जो जन्मजात हो स, या विशेषता उरे रहण त नहीं बल्कि जन्म घुट्टी में पीण त आवे स डबलिंग बोली हरियाणे की........

डबलिंग हरियाणे की सबते न्यारी स
जिसने आगि बोलनी वो सबपे भारी स
चाय- चूए, लास्सी- लुस्सी दूध-दाद देखो
चूल्हा-चाल्हा,रोटी-राटी, एक आध देखो
भैंस-भूंस,गाय- गुए, डांगर-डूंगर देखो
खोर-खार, नौरा- नारा, टींगर-टुंगर देखो
माणस-मुनस, खाना- खुणा. खाया-खुई करते
बूढी-बाढ़ी, लुगाई-पताई, वांर राइ रुई धरते
छोरे-छारे, छोरी-छ्पारी, जद भाभी-भुभी बोल्ले
मां-मू ,भाई-भुई ना बोलते आंनी तोल्ले
सुट-साट, पैंट-पुन्ट लुंगी-लांगी देखो
धोती-धाती, कुरता-कारता,गूंगी-गांगी देखो
अर हरियाणवी बोल्ल्निया संस्कृति का पुजारी स....डबलिंग हरियाणे की................
रिश्ते-राष्त्या का उरे जब जिक्र-जुकर चाल्ले
सुनके दुनिया का कालजा दो हाथ हाल्ले
ताई-तुई, काकी-कुकी,दादा-दुदा देखो
दादी-दूदी, भुवा-भावा, चाची - चूची देखो
बेबे-बाबे, जीजा-जाजा, बेटा-बाटा देखो
कहावता में आके फसरया, बिरला टाटा देखो
अर देखो कहण आल्ले क्यूकर भ्यानी-भुन्नी बोल्ले
बाल्टी-बुलटी,कुवां-कावां, पाणी-पूणी बोल्ले
खेत क्यार, नहर-नाहर, गेहूं-गांहू देखो
सब हरियाणे में घूम के अच्छी दाऊ देखो
पाओगे उरे भाईचारे की खेती क्यारी स.........डबलिंग हरियाणे की................
अफसर- उफसर, डाक्टर-दुकटर नर्स-नुर्स देखो
डिग्री-डागरी, पढ़ना-पुढ्ना, कोर्स- कुर्स   देखो
मास्टर-मुस्टर, मैडम-माडम, स्कूल- स्काल  देखो
हर शब्द की प्याज़ ज्यू  उतरती खाल देखो
देखो क्यूकर ब्याह-ब्यूह में नाचा- नुची  होरी
कूद-कूद के छड़े आंगन, के छोरा के छोरी
मंत्री मुन्त्री, एसपी-उस्पी, डीसी-डासी सारे
माहरी बोली, बोल बाल के चोगरदू के छारे
रामदेव के नुक्ते--नाकते दुनिया भर में देखो
हाज़िर जवाबी के मास्टर हरेक  घर में देखो
अर देखो चुटकलों की धरती मुस्कुरा री स.......डबलिंग बोली हरियाणे की ...........

Thursday, 7 July 2011

लो भाईओ कविता न ध्यान त पढो अर बताओ के नौजवानों के मन की बात को कहने में किस हद तक सफल हुआ हूँ बापू समझया कर

बापू समझया कर, इब मैं छोटू कोन्या रहया
भूख त ज्यादा खाया करता वो मोटू कोन्या रहया
बीस साल त ऊपर मेरी उम्र  हो ली स
ध्यान त देख मैंने अपनी जिंदगी संजो ली स
तेरे पैर की जुती मेरे छोटी आवे स
बापू,, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरा सारा मुह ढाढ़ी का भरा स
पूरा आदमी लागु सु ,, के होया जै बदन छरहरा स
विश्वास कर बापू, मैं गलत संगत में कोन्या बैठता
अर इब तो,, बात-बात प भी कोन्या एठता
गौर त देख,,मैं बड़ा होग्या सूं
अपने पैरा पर खड़ा होग्या सूं
भले बुरे की मैंने सारी समझ आवे स
अर बापू, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरी चिंता करनी छोड़ दयो
अपनी देई का ध्यान धरो,
शरीर बुढा हो लिया स, ना खुद न परेशान करो
थारे नाम न बदनाम नहीं करूंगा
कदे नीची देखनी पड़े, इस्सा कोए काम नहीं करूंगा
थारे टेम अर माहरे टेम में दिन रात का फर्क स
वो टेम स्वर्ग था तो यो टेम एकदम नर्क स
फेर भी इस नर्क में मैं पूरा नहीं धसूंगा
थम घबराओ मत ,, क्याये में नहीं फसूँगा 
अर बापू,,,
तू भी तो कदे जवान था
कालिज अर बाहर दोस्त की शान था
अर बापू या बात तू ए तो कह्य करे स
के, जवानी आदमी के बचपन न हरे स
तो बापू, बचपन मेरा भी हरया गया
कदम जवानी का धरया गया
इब त ए बता इसमें मेरा के कसूर स
वो बचपन ए मेरे त दूर स
अर तू मैंने फेर भी बालक कहवे स
न्यू बता,, कदे उलटी गंगा भी बहवे स
अर जवानी के दर्द त तू अनजान नहीं स
माहरे टेम में फेर भी दर्द की लिस्ट नई स
सबते ऊपर बेरोज़गारी का दर्द
फेर तान्या की आरी का दर्द
अर बापू,, दर्द महोब्बत का के कम स
जिसका होना भी अर ना होना भी गम स
आर बापू मेरी हिम्मत तो देख
मैं फेर भी जीवन लाग रहया सुं
इतने सारे दर्दा न एकला ए पीवन लाग रहया सुं
इतना सब कुछ सहके भी मेरे आंसू नहीं आवे  स
आर बापू ,, त मैंने फेर भी बालक बतावे स
याद कर बापू,,  जद तू रोज़ उंवारी आया करता
अर मेरा दादा तैने आती ए धमकाया करता
उन दिना तेरे के मन में आया करती
साचली बताइए, भीड़ी पड़े थी न उन दिना धरती
फेर आज क्यों मेरी गैल दबान लाग रे सो
मैं सब समझू सू, जिसे बाता के गोले दाग रे सो
थारी नजर में मैं गलत सू , तो यो घर बार छोड़ दयूंगा
कोन्या चाहिए दौलत माँ का भी प्यार छोड़ दयूंगा
थारी मेहरबानी त आज इतना बड़ा होग्या सू
खुद का तो पेट भर ए ल्यूँगा, पैरा प खड़ा होग्या सू
मैं तो चला जाऊंगा, पर मेरी माँ का जी क्यूकर लागेगा
उसका तो कालजा मेरे बिना बेचैन होके भागेगा
पर बापू थारे एक दिन समझ में आवेगी
जद या थमने दुनिया बतावेगी
अक खुशीराम छोरा तो तेरा नेक था
तू ए गलत स,, वो तो लाखां में एक था
अर भगवान ना करे बापू,, उस दिन देर हो जावे
थारी निगाह का यूं बालक, किते भीड़ में खो जावे
वक्त स इब भी सम्भल ज्या बापू,,,
बदलते होए टेम में ढल ज्या बापू
नहीं तो बात मेरे हाथा त लिकड जावेगी
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......

Wednesday, 6 July 2011

लो मेरे यारो दिलदारो गुज़रे जमाने के किस्से आप सब के हिस्से मुलाकात कर ले.......



गाँधी आल्ले नोटा त यारी स मुलाकात कर ले
मेरी आज तो जेब भारी स मुलाकात कर ले
इडली, डोसे, गर्म समोसे, बेशक ठंडे पी लिए
लूटन-पीटन की तैयारी स मुलाकात कर ले
प्राइवेट काम करूं था तो तेरी सेवा कम होवे थी
इबके नौकरी सरकारी स मुलाकात कर ले
जिस टेम त आये स मेरे हाथा में दो पैसे
या ए बात सता री स मुलाकात कर ले
तू पिछली बार ख़ाली पर्स त बिल देना चाहवे थी
तेरी वा ए अदा भा री स मुलाकात कर ले
बाद में तो दो मिनट का भी ना टेम देवेगा बेचैन
जद तक बहू जा री स मुलाकात कर ले ..............मेरी आज तो जेब भारी स ......................

लो भाई ओ आज की दारुशाला से दो पैग आपके लिए


सबते पहल्या जिसने पी उसने मेरी राम राम
दारू की बोतल जिसने ली उसने मेरी राम राम
दारू जिसने पहल्या बनाई वो मानस नहीं भगवान था
दुःख की दवा बनावन आल्ला क्यूकर कहू इन्सान था

जुग- जुग जीवे काडनिया जुग जुग जीव ठेकेदार
माटी का जिसने प्याला बनाया जुग जुग जीवे वो कुम्हार
उन कीड़ा का भी हो भला जो बार बार दारू चाहवे स
अर उनके पैरा में प्रणाम जो बिना पानी पी जावे स

Tuesday, 5 July 2011

नौजवान भाई ओ के लिए पेश है उनके मन की बात

देके हजार रपिये किराया जोश में रह्ल्यांगे
उसके दिल में ना रहे तो पडोस में रह्ल्यांगे
मिल्या करेगी निगाह फेर रोज़ आपस में
बात ना होवे ना सही खोमोश में रह्ल्यांगे
लिख  के रोज़ चिच्ठी उसके घर न फेकांगे
व जवाब नहीं देवेगी तो रोस में रह्ल्यांगे
होज्यागी रिश्तेदारी फेर गली के छोरया त
थारा   जीजा लागु सूं इस धोंस में रह्ल्यांगे
मैं फस्ग्या जिस दिन उसके लठधारी भाईया क
सच्चा प्यार करा सां बदनाम नहीं करांगे
जित चाहवे ब्याह कर लेगी हम लोस में रह्ल्यांगे
वा साबत डोसा खागी तो के जी लिकडग्या माहरा
वा राज़ी रहियो हम तो सोस में रह्ल्यांगे
घर के सारे सोढ़- सोढ़ीये दे देगा बेचैन उसने
जाड़े की भरी रात में भी ओंस में रह्ल्यांगे