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Wednesday, 16 November 2011

इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां

एक बै लिलू अर धारा आहते मै बैठे पीण लाग रे
लिलू - भाई धारे आज तै इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां
आहते आला आया अर बोल्या - अरै कमिनों, श्यामी एक ए पेड सै, ईब के य्हाडै जंगल बणाओगे...?

Saturday, 12 November 2011

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी
दो कौफी में लम्बी मुलाक़ात होया करेगी

स्वेटर जाकेट पहर के मैं भी मोटा दिखूंगा
मेरी कमजोरी पर ना इब बात होया करेगी

कितनी ए कॉफ़ी पी ले, वा सहेलियां कै संग
ना बिल नै लेके कोए खड़ी खाट होया करेगी

दिसम्बर जनवरी में जद भी बैठांगे पार्क में
गुनगुनाती धुप भी माहरे साथ होया करेगी

हाथ पकड़ के चालांगे तो किसे ना दिखांगे
जद बेचैन धुंध आल्ली बरसात होया करेगी


Friday, 4 November 2011

दबंगा की दमबाजी नै पपोल के जाऊंगा



पहली बार आया सूं कुछ बोल के जाऊंगा
कालजा चार भाईया का छोल के जाऊंगा

सीधी चोट मारूंगा सबते निचले घड़े कै
दबंगा की दमबाजी नै पपोल के जाऊंगा

शक्ल तै बावलीबूच दिखू सूं तो के होया
स्याणे लोगा की नब्ज़ टटोल के जाऊंगा

उम्र भर मात्राओ के बोझ तले दबे सै जो
मैं वजन उन शायरों का तोल के जाऊंगा

कदे सौ ग्राम भी दूध ना देते पड़ोसिया नै
झोटी उन ज़मींदारा की खोल के जाऊंगा

मीठे के बाद नमकीन खावनिया खातिर
मैं चासनी में लाल मिर्च घोल के जाऊंगा

वो मुद्दत कै बाद मिल्या सै अकेला बेचैन
आंसूआ तै मैल मन का खंगोल के जाऊंगा

चुप थोड़े रहूँगा

मौका लाग्या सै आज चुप थोड़े रहूँगा
चाहे हो किसे कै खाज चुप थोड़े रहूँगा

मन की भडास सारी ए लिकाड़ दयूंगा
चाहे बुरा मानो समाज चुप थोड़े रहूँगा

अच्छे और बुरे की सब समझ आवे स
मैं भी खाऊं सूं अनाज चुप थोड़े रहूँगा

पैरां त पैदल सूं मगर दिमाग त नही
जब खुलग्या सै राज़ चुप थोड़े रहूँगा

मेरी शराफत उननै कमजोरी लागे सै
बणना पड़ेगा बेल्याज़ चुप थोड़े रहूँगा
क्यूकर जतावेगा वो अहसान मदद का
मैंने दे राख्या सै ब्याज चुप थोड़े रहूँगा

बेशक देर सवेर करूं दुश्मना का बेचैन
करके छोड़ना सै इलाज़ चुप थोड़े रहूँगा

Thursday, 3 November 2011

फफेड दयूंगा



धरके एडी बहम थारे सब उखेड दयूंगा
मतन्या एंडी पाको ना तो फफेड दयूंगा

लाल मिर्च सा लडूंगा तीखा मैं बैरीया क
मन भिर्डा के छत्ते न जब भी छेड़ दयूंगा
ज्ञान घणा सा झाडेगा जो कोए बढ़कर
उसकी अक्ल के दरवाजे मैं भेड़ दयूंगा 
कितणी ए खिलाफत करलो मेरे बारे में
एक दिन करी कराई पै पाणी गेड दयूंगा

कुछ वक्त की यात्ता होई कुछ माडे हालात
कद सोची थी बेचैन दिल में तरेड दयूंगा
 

Wednesday, 2 November 2011

माणस के स तू

 खूब तरक्की कर ली, फेर भी जूतम पैजार माणस के स तू
सब लूटके खाग्या फेर भी रहग्या भूखा यार माणस के स तू

कहवे वंशज़ माहरे देवता थे, पर तू कित त आया
कित त झूठ चोरी जारी और मक्कारी न ल्याया
सोच-सोच के पागल होग्या मैं तो सौ-सौ बार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

जित फायदा नजर आवे ,वहां जात दिखा दे स
वक्त पड़ण पै गधे न भी क्यूं बाप बणा ले स
नकली दंगल बोल्ले स तैने क्यूं तेरे रिश्तेदार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

कहवे आदमी खुद न और ढंग डांगरा आल्ले
ना भर पाया पेट छोटा सा तू उम्र भर साल्ले
उसकी खाट खड़ी कर दे ,जो तेरे पै करे उपकार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

जुबान इतनी मीठी बणाली गुड भी शर्मावे
आस औलाद और सू राम की बिन सोचे खावे
दान धर्म और दया का झूठा बण रह्या ठेकेदार माणस के स तू 
सब लूट के खाग्या.................

लोभ हवस के बाळ पलक त क्यूं नही पड़वाता
खूबसूरत बाहण छोड़ क्यूं दिल और पै ल्याता
हर वक्त रहवे बेचैन और बोल्ले खुद न समझदार माणस के स तू
सब लूट के खाग्या.................

Monday, 31 October 2011

दिल में सदा गीता और कुरान राखियो

बणना चाहो कलाकार तो ध्यान राखियो
उस्ताद और प्रशंसका का मान राखियो

कदे भी नही फसोगे यारों धर्म संकट में
दिल में सदा गीता और कुरान राखियो
ज्यादा बड़ी प्लानिंग की जरूरत नही स
बस थोडा सा दुश्मन न परेशान राखियो
के भरोसा नसीब में हो एक और तलवार
छिपा कर थम अलग त म्यान राखियो
एक दिन तो काम की बात सुनाई देवेगी
थम यारों खुले अपने दोनों कान राखियों
बेशक तारे महबूब खातिर तोडण जाइयों
पर मां बाप के ख्वाब की भी आन राखियों

मजिल त भी आगे की दुनिया दिखा देवेगी
बेचैन मीठी सदा बस अपनी जुबान राखियों


Sunday, 30 October 2011

ना दिखाईयो कदे ज़ात चौधरी बणन खातर

ध्यान में राखों बात चौधरी बणन खातर
होणी चाहिए औकात चौधरी बणन खातर

घर की गाडी ना समझों, दहेज़ आल्ली कार
अपना जुगाड़ जगन्नाथ चौधरी बणन खातर
विरासत में तो बाप मैन्ने दुनिया देग्या था
 न्यारी करूं सूं खुबात चौधरी बणन खातर
किराये के माणस कत्ति धापके नकली हो स
घर का ए चाहिए गात चौधरी बणन खातर
जो अपणे दम प जिंदा स उनते पूछ क देख
कितने लगाये दिन रात चौधरी बणन खातर
मेहनत पर विश्वास करो सब ठीक होज्यागा
ना दिखाईयो कदे ज़ात चौधरी बणन खातर

बस टांग खिंच के कदे ना उपर चढ़ीये बेचैन
उच्चे राखियें ख्यालात चौधरी बणन खातर

Sunday, 9 October 2011

बाप बेटे की जब त बिगड़ी



न्यू तो टाइम पास हो रह्या स
पर थोड़ा सा नाश हो रह्या स
दोस्त शक के घेरे में आग्या
दुश्मन कुछ ख़ास हो रह्या स
नई रिश्तेदारी टूटेगी शायद 
कसूता ए मिठास हो रह्या स  
बाप बेटे की जब त बिगड़ी
परम्पर त बनवास हो रह्य स
लवर की नही खा मां की सूं
तेरे प कम विश्वास हो रह्य स
अनजान हादसा सोचके बेचैन
थोडा सा मन उदास हो रह्या स

Wednesday, 5 October 2011

शूर्पनखा की माना तो,भाई होवे रावण बरगा




दशहरे के मौके पै आओ उल्हाना उतार देवां
अपने अपने मन का मिलके रावण मार देवां
हम भरत लक्ष्मन सा तो राम की सेवा करां
या फिर राम बनके छोट्या पै सब वार देवां
दिलों दिमाग त नफरत का ख्याल काढ के
अपने हर रिश्ते नै प्यार के बदले प्यार देवां
इज्जतदार समाज हो सोच गर या लेरे सो
छोरियां नै लेके आओ नजरियाँ संवार देवां
बेशक जाके चाँद पै कोए भाई प्लाट कटवाले
पर सदा औकात नै हम जमीनी आधार देवां
शूर्पनखा की माना तो,भाई होवे रावण बरगा
इस सच्चाई पै आओ अपणे हम विचार देवां 
जात धर्म गरीबी और महंगाई की दुश्मन हो
बेचैन समाज नै हम मिलकर वा सरकार देवां