khas log

Friday, 6 January 2012

मर जायेगी पर किसी गरीब के काम ना आयेगी ...

 भिखारी ...एक लङकी से

क्या तुम मुझ से शादी करोगी !

लङकी ...शक्ल देखी है अपनी आईने मेँ
तुम से शादी करने से अच्छा तो मेँ फांसी पर लटक जाऊँ

भिखारी ...हे राम ,मर जायेगी पर किसी गरीब के काम ना आयेगी ...

झूठ पकड़ने वाला रोबोट

एक आदमी झूठ पकड़ने वाला रोबोट
खरीद कर लाया जो आदमी को झूठ
बोलने पर थप्पड़ मारता था उसने रात
के खाने के समय पर इसका परीक्षण
करने की सोची!बाप: बेटा, आज तुम स्कूल के समय पर कहाँ थे?बेटा: स्कूल में ही था पापा!
रोबोट ने बच्चे को थप्पड़ मार दिया!बेटा: बताता हूँ!
दोस्त के साथ डी.वी.डी पर पिक्चर देख रहा था!बाप:
कौन सी?बेटा: कुंग -फु -पंडा!रोबोट ने फिर से बच्चे
को थप्पड़ मार दिया!बेटा: ठीक है बताता हूँ, ये एक
अश्लील पिक्चर थी!बाप: क्या? जब मैं तुम्हारी उम्र का था तो मुझे पता भी नहीं था की ऐसी पिक्चर
भी होती है! रोबोट ने बाप को एक थप्पड़ मार दिया!माँ:
हा हा हा कर हंसने लगी, आख़िरकार बेटा तो ये
तुम्हारा ही है न!और रोबोट ने माँ को थप्पड़ मार दिया

क्यूं इसकी के आंख दुखणी आ री है।

हरियाणा में जब एक कंडक्टर ने बकाया राशि देते हुए एक गला हुआ सा दस का नोट किसी सवारी को दिया
तो सवारी बोली - ये नोट बदल दो।

उसकी बात सुनकर कंडक्टर ने ताना मारा -
क्यूं इसकी के आंख दुखणी आ री है।

Thursday, 5 January 2012

आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

दर्द नै सहणा तो दवाई सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

जन्मजात नही होता कोए खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई सिखावे सै

शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई सिखावे सै

जिनका वास्ता पड्या सै वे जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई सिखावे सै

तेरे साथ नै तो सदा बेचैन करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई सिखावे सै

Saturday, 26 November 2011

उसते बड़ा कपूत कौण होवेगा

दिल के मामले में मात खाग्या
हमने तो म्हारा ज़ज्बात खाग्या

गाम नै तो बख्श दिया था हक
पर रिश्तेदार हाथों हाथ खाग्या

इतणा चालाक लिकडया महबूब
मिलते ही काम की बात खाग्या

उसते बड़ा कपूत कौण होवेगा
जो बेटा बाप की खुबात खाग्या

हद की भी हद होवे सै बेचैन
वो कैसे अपणी औकात खाग्या

झूठ का धंधा बकवास होवे सै

नाश करणिया का नाश होवे सै
झूठ का धंधा बकवास होवे सै

मेहनती अर इमानदार सै जो
जीत की उसे तै आस होवे सै 

जद तै बसंती नै जींस पहरी सै
पप्पू भी लगातार पास होवे सै

सै पलक पै जिसके लोभ का बाळ
दौलत उसकी ए दास होवे सै

साजिस अच्छी वो रचेगा बेचैन
माणस जो अपना ख़ास होवे सै 

Wednesday, 16 November 2011

इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां

एक बै लिलू अर धारा आहते मै बैठे पीण लाग रे
लिलू - भाई धारे आज तै इतणी पीवैंगे जब ताईं श्यामी आले तीन पेड छह ना दिखण लाग जां
आहते आला आया अर बोल्या - अरै कमिनों, श्यामी एक ए पेड सै, ईब के य्हाडै जंगल बणाओगे...?

Saturday, 12 November 2011

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी

जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी
दो कौफी में लम्बी मुलाक़ात होया करेगी

स्वेटर जाकेट पहर के मैं भी मोटा दिखूंगा
मेरी कमजोरी पर ना इब बात होया करेगी

कितनी ए कॉफ़ी पी ले, वा सहेलियां कै संग
ना बिल नै लेके कोए खड़ी खाट होया करेगी

दिसम्बर जनवरी में जद भी बैठांगे पार्क में
गुनगुनाती धुप भी माहरे साथ होया करेगी

हाथ पकड़ के चालांगे तो किसे ना दिखांगे
जद बेचैन धुंध आल्ली बरसात होया करेगी


Friday, 4 November 2011

दबंगा की दमबाजी नै पपोल के जाऊंगा



पहली बार आया सूं कुछ बोल के जाऊंगा
कालजा चार भाईया का छोल के जाऊंगा

सीधी चोट मारूंगा सबते निचले घड़े कै
दबंगा की दमबाजी नै पपोल के जाऊंगा

शक्ल तै बावलीबूच दिखू सूं तो के होया
स्याणे लोगा की नब्ज़ टटोल के जाऊंगा

उम्र भर मात्राओ के बोझ तले दबे सै जो
मैं वजन उन शायरों का तोल के जाऊंगा

कदे सौ ग्राम भी दूध ना देते पड़ोसिया नै
झोटी उन ज़मींदारा की खोल के जाऊंगा

मीठे के बाद नमकीन खावनिया खातिर
मैं चासनी में लाल मिर्च घोल के जाऊंगा

वो मुद्दत कै बाद मिल्या सै अकेला बेचैन
आंसूआ तै मैल मन का खंगोल के जाऊंगा

चुप थोड़े रहूँगा

मौका लाग्या सै आज चुप थोड़े रहूँगा
चाहे हो किसे कै खाज चुप थोड़े रहूँगा

मन की भडास सारी ए लिकाड़ दयूंगा
चाहे बुरा मानो समाज चुप थोड़े रहूँगा

अच्छे और बुरे की सब समझ आवे स
मैं भी खाऊं सूं अनाज चुप थोड़े रहूँगा

पैरां त पैदल सूं मगर दिमाग त नही
जब खुलग्या सै राज़ चुप थोड़े रहूँगा

मेरी शराफत उननै कमजोरी लागे सै
बणना पड़ेगा बेल्याज़ चुप थोड़े रहूँगा
क्यूकर जतावेगा वो अहसान मदद का
मैंने दे राख्या सै ब्याज चुप थोड़े रहूँगा

बेशक देर सवेर करूं दुश्मना का बेचैन
करके छोड़ना सै इलाज़ चुप थोड़े रहूँगा