तू कोए काम धंधा कर आशिकी छोड़ दे प्यारे
याए कहरे धरती अम्बर आशिकी छोड़ दे प्यारे
जो तेरे त दूर रहवे स वा सिर प आके बैठ ज्यागी
फेर रोवेगा जीवन भर आशिकी छोड़ दे प्यारे
--------------------------------------------------
महोब्बत जिसने कह रह्य स, उसका नाम स खर्चा
आज की हीर और मीरा का कराना काम स खर्चा
रोवेगा छोरिया खातर तो एक दिन आंधा होज्यागा
नहीं मेरी तेरे जंचती, तो करवा इश्क प चर्चा
-----------------------------------------------------------------
हाथ न माथे प धरके, तू एक दिन रोवेगा बेटा
गये दिन याद कर करके, तू एक दिन रोवेगा बेटा
उसने हर बार हज़ारां का, गिफ्ट देवन त पहल्या सुन
कर्ज़ में डूब्या पाछे तू ,नौकरी टोहवेगा बेटा
-------------------------------------------------------------
प्यार एक तरफा कर बैठ्या,तो होणा स हंगामा
इस्सा पहलवान देई का , तू कोन्या दीखता गामा
इश्क जिसते तू कर रह्य स, वा शादी करके चल ज्यागी
कह्वेंगे साल भर पाछे, उसके बालक तैने मामा
---------------------------------------------------
तू कोए काम धंधा कर -------------------
आप सभी का मेरी blogs पर स्वागत है,, प्लीज़ अपनी नजरे इनायत करके जरुर बताएं की मैं दिल की बात कहने में कहाँ तक सफल हुआ हूँ..| http://bechainkigazleblogspotcom.blogspot.com/2011/09/blog-post_17.html http://bechainkesher.blogspot.com/ http://vmbechain.blogspot.com/?zx=40fa6e9f43ea7230 http://bechainartical.blogspot.com/http://www.youtube.com/my_videos?ls=public
khas log
Friday, 22 July 2011
तेरी जुल्फ और मेरा ख्याल न सुलझेंगे
जद कदे भी तैने मेरी याद सतावेगी
राम कसम तैने नींद ना आवेगी
तेरी जुल्फ और मेरा ख्याल न सुलझेंगे
जितनी करेगी कोशिश उतने ही उलझेंगे
मन की हिरनी जितना ए तेज़ भगावेगी............राम कसम,,,,,,,,,
दर्द जुदाई का कुछ इस तरह मिटाउ सूँ
तेरे हिस्से का टेम एकला बिताउ सूँ
बाट में सूँ तू कदे आंसुआ त नहावेगी .........राम कसम तू .............
किसका था कसूर तैने हाल सारा बेरा था
रौशनी में कौन नहाया किसके घर अँधेरा था
किसके आगे बात तू साच्च्ली बतावेगी .........राम कसम
राम कसम तैने नींद ना आवेगी
तेरी जुल्फ और मेरा ख्याल न सुलझेंगे
जितनी करेगी कोशिश उतने ही उलझेंगे
मन की हिरनी जितना ए तेज़ भगावेगी............राम कसम,,,,,,,,,
दर्द जुदाई का कुछ इस तरह मिटाउ सूँ
तेरे हिस्से का टेम एकला बिताउ सूँ
बाट में सूँ तू कदे आंसुआ त नहावेगी .........राम कसम तू .............
किसका था कसूर तैने हाल सारा बेरा था
रौशनी में कौन नहाया किसके घर अँधेरा था
किसके आगे बात तू साच्च्ली बतावेगी .........राम कसम
Thursday, 21 July 2011
एक चुटकला मेरी मैडम का बताया होया सुनो याद आगया
किसे क घर में ब्याह टेक राख्या था,, वहा घणी ए लुगाई आरी थी,, इब एक लुगाई ताऊ कसूते की बहू त बोली ए बेबे यो पीढ़ा दिए दिखा,,,सुनके दूसरी बोली के करेगी ,तो वा लुगाई बोली पीढ़े पे बैठके गीत गाऊँगी,, इब कसूते की बहू बोली ,,,आछ्या तू पीढ़े पर बैठ के गीत गावेगी तो मैं के उरे तेरे खसम न रोवण आरी सूं
शबनम का कत्ल करने वाली भौर ना हो तो अच्छा है
दिल में किसी की यारी का शोर ना हो तो अच्छा है
करम दोस्तों के अब और ना हो तो अच्छा है
ना सजे कही महफ़िलें और ना कही मैं शेर कहू
झूठी वाह-वाह सुनने का दौर ना हो तो अच्छा है
झूठी है तो झूठ रहे होठों की मुस्कान मगर
धडकनों पे किसी का गौर ना हो तो अच्छा है
बेशक रहे ख्वाब अधूरे रात मगर ये रात रहे
शबनम का कत्ल करने वाली भौर ना हो तो अच्छा है
देख लिया परख के बेचैन, गैर-गैर ही निकले
भविष्य में दिल का कोई चितचोर ना हो तो अच्छा है
करम दोस्तों के अब और ना हो तो अच्छा है
ना सजे कही महफ़िलें और ना कही मैं शेर कहू
झूठी वाह-वाह सुनने का दौर ना हो तो अच्छा है
झूठी है तो झूठ रहे होठों की मुस्कान मगर
धडकनों पे किसी का गौर ना हो तो अच्छा है
बेशक रहे ख्वाब अधूरे रात मगर ये रात रहे
शबनम का कत्ल करने वाली भौर ना हो तो अच्छा है
देख लिया परख के बेचैन, गैर-गैर ही निकले
भविष्य में दिल का कोई चितचोर ना हो तो अच्छा है
दामण बावन गज का भारी मिले तो बतो दियो
किते वा सामण की खुमारी मिले तो बता दियो
बहुत लम्बे टेम त भाईओ मैं परेशान हो रह्य सूं
कोए संस्कृति का पुजारी मिले तो बता दियो
किते वा सामण की खुमारी मिले तो बता दियो
बहुत लम्बे टेम त भाईओ मैं परेशान हो रह्य सूं
कोए संस्कृति का पुजारी मिले तो बता दियो
दोस्तों आप लोगो को याद हो कई साल पहले अमेरिकी रास्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आये थे,, वे जब भारत आये तो उस फाग था,, याद दिला दू की जनाब दिल्ली आये और वह
हम बात देखते रहे ना हरियाने में आया
बैरी क्लिंटन न जाके जयपुर गुलाल उड़ाया
माहरा गोबर और कीचड़ धरा धराया रहग्या
ग्रीस गेल्या कला तेल दो मिनट में बह्ग्या
रंग कई ढाल के धर राखे थे
कोरडे तैयार कर राखे थे
पर हाथ त लिकडग्या,,, जाके दिल्ली बढग्या
नहीं तो बता देवा अर,,,, फाग हरियाने का चखा देवा अर
ठाके होदी में गेर देते,, थापी कोरडे के मन्त्र फेर देते
क्लिंटन न जीस्सा आ जाता ,, अगर भांग आल्ली कुल्फी खा जाता
व्याइट हॉउस भूल जावे अर , ज माहरे गाम में घूम आवे अर
अमेरिका बाट देखता,, ठा-ठा के न टांट देखता
माहरा रास्ट्रपति कोन्या आया,, देश का पति कोन्या आया
पर उनने के बेरा क्लिंटन न कित धूणा ला राख्या स
इबके उसने हरियाणे का फाग चाख्या स
कोरडे ज्यादा लागगे होंगे,,, साथ आवनिये भागगे होंगे
इब किसने बेरा बिचारा हरियाने में ही फस रह्य स
वो तो फाग आल्ले दिन त गार में धंस रह्य स
पर इसमें उसका के कसूर स
यो तो हरियाने का दस्तूर स
ठाके नाली में फेंक देवे स
क्लिंटन हो चाहे भाती,, लठा का चेक देवे स
सारी देई न लांबी कर देवे स
अर मार मार कोरडे पेटा सा भर देवे स
और फेर कहवे स होली स भाई होली स बुरा ना मनो होली स
बैरी क्लिंटन न जाके जयपुर गुलाल उड़ाया
माहरा गोबर और कीचड़ धरा धराया रहग्या
ग्रीस गेल्या कला तेल दो मिनट में बह्ग्या
रंग कई ढाल के धर राखे थे
कोरडे तैयार कर राखे थे
पर हाथ त लिकडग्या,,, जाके दिल्ली बढग्या
नहीं तो बता देवा अर,,,, फाग हरियाने का चखा देवा अर
ठाके होदी में गेर देते,, थापी कोरडे के मन्त्र फेर देते
क्लिंटन न जीस्सा आ जाता ,, अगर भांग आल्ली कुल्फी खा जाता
व्याइट हॉउस भूल जावे अर , ज माहरे गाम में घूम आवे अर
अमेरिका बाट देखता,, ठा-ठा के न टांट देखता
माहरा रास्ट्रपति कोन्या आया,, देश का पति कोन्या आया
पर उनने के बेरा क्लिंटन न कित धूणा ला राख्या स
इबके उसने हरियाणे का फाग चाख्या स
कोरडे ज्यादा लागगे होंगे,,, साथ आवनिये भागगे होंगे
इब किसने बेरा बिचारा हरियाने में ही फस रह्य स
वो तो फाग आल्ले दिन त गार में धंस रह्य स
पर इसमें उसका के कसूर स
यो तो हरियाने का दस्तूर स
ठाके नाली में फेंक देवे स
क्लिंटन हो चाहे भाती,, लठा का चेक देवे स
सारी देई न लांबी कर देवे स
अर मार मार कोरडे पेटा सा भर देवे स
और फेर कहवे स होली स भाई होली स बुरा ना मनो होली स
Monday, 18 July 2011
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
कौन बैठेगा भला आकर मुझ ठूंठ के नीचे
ना छाया देता हूँ, ना असर बहारो का है
खूब देख लिया घूम फिर के दुनिया में
ना कोए गमख्वार वक्त के मारो का है
गला घोंट दू यादों का नया घर बसा लूं
मुझसे ना होगा ये काम तो गदारो का है
वो तो गम की कैद में हूँ वरना देता
क्या मतलब आजकल तेरे इशारों का है
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
दिल जलाने में हाथ हलकी फुहारों का है
ना छाया देता हूँ, ना असर बहारो का है
खूब देख लिया घूम फिर के दुनिया में
ना कोए गमख्वार वक्त के मारो का है
गला घोंट दू यादों का नया घर बसा लूं
मुझसे ना होगा ये काम तो गदारो का है
वो तो गम की कैद में हूँ वरना देता
क्या मतलब आजकल तेरे इशारों का है
हो जाती बरसात तो ना सुलगता बेचैन
दिल जलाने में हाथ हलकी फुहारों का है
Saturday, 16 July 2011
पेश है बेरोज़रो के मन की बात
र नौकरी तेरे बिना तो डिग्री बराबाट होरी स
र कित सोवां, माहरी तो खड़ी खाट होरी स
होरया बिस्तर गोल देश में बेरोजगार भाईआ का
छोड़ी छाती छः फुट के, पर दिल रह रह्य स पाईया का
के कर लेवे तेरे रंज में देई त गिर रे स
अर हाय नौकरी हाय करते करते फिर रे स
के बेरा त सत्यानासन कितना और सतावेगी
बूढ़े होंगे धोले आगे कद तए तू ना थ्यावेगी
पढ़ते आणी सोची थी तैने आसानी त पाल्यंगे
दसमी करया पाछे तैने किते त भी ठाल्यांगे
पर फार्म भर-भर के न हम तो सारी दुनिया घूम आयें
हाय नौकरी तेरा ठिकाना किते भी ना टोह पाए
तेरे बिना तो जीना माहरा नर्क होरया स
भरी जवानी के म बेडा गर्क होरया स
अर तेरे बिना तो ब्याह शादी में आंट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
उम्र तीस की दिखे पचपन बिना नौकरी के यारो
जवानी त आछ्या लागे बचपन बिना नौकरी के यारो
अर बिना नौकरी रे-रे- माटी इसी होज्या स
जणु भरे रेत के आंगन में कोए सुई खोज्या स
अर होज्या स बर्बाद बुढ़ापा छोरे की हालत देख के
वो सिर पे कुण्डी ठाले स जद डिग्री-डागरी फेंक के
र बेकारी का इसते बड़ा कोए और उदाहरन के बतावे
बी ए ऍम ए पास छोरे आज देश में औटो चलावे
के कर लेवां तेरा नौकरी तेरी न्यारी श्यान स
बेकारी के मन्दिर में तू ए तो भगवान स
तू ए इब आबाद करेगी, तू ए देवेगी जिस्सा
तू ए दूर करे बेकारी, तू ए देवेगी पिस्सा
अर तू स जिसके धोरे जिंदगी ठाठ होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
खदरधारी के आंगन में तू गंगा बनके बहवे स
जाणा सां तू रिस्पतपुर के सिफारिस नगर में रहवे स
अर शक्ल में जिनके बारा बजरे, बोलन की तमीज़ कोन्या
कई इसे नौकरी कर रे स जो इंसानियत के बीज कोन्या
पांच मिनट के काम में दस-दस घंटे ला दे स
बाप की जागीर समझ के कुर्सी देश का धुम्मा ठा दे स
एक त मिलरी स उन न नौकरी, ना तो दिखे दिन में तारे
बेकारा की भीड़ में वे भी पावे किते तेरे मारे
बेकारी के दर्द का उनके दिल में जद अहसास होवे
तेरे कारण जगह-जगह पे उनका भी उपहास होवे
बेचैन नौकरी कईया न तो आज पकोड़े चाट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
र कित सोवां, माहरी तो खड़ी खाट होरी स
होरया बिस्तर गोल देश में बेरोजगार भाईआ का
छोड़ी छाती छः फुट के, पर दिल रह रह्य स पाईया का
के कर लेवे तेरे रंज में देई त गिर रे स
अर हाय नौकरी हाय करते करते फिर रे स
के बेरा त सत्यानासन कितना और सतावेगी
बूढ़े होंगे धोले आगे कद तए तू ना थ्यावेगी
पढ़ते आणी सोची थी तैने आसानी त पाल्यंगे
दसमी करया पाछे तैने किते त भी ठाल्यांगे
पर फार्म भर-भर के न हम तो सारी दुनिया घूम आयें
हाय नौकरी तेरा ठिकाना किते भी ना टोह पाए
तेरे बिना तो जीना माहरा नर्क होरया स
भरी जवानी के म बेडा गर्क होरया स
अर तेरे बिना तो ब्याह शादी में आंट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
उम्र तीस की दिखे पचपन बिना नौकरी के यारो
जवानी त आछ्या लागे बचपन बिना नौकरी के यारो
अर बिना नौकरी रे-रे- माटी इसी होज्या स
जणु भरे रेत के आंगन में कोए सुई खोज्या स
अर होज्या स बर्बाद बुढ़ापा छोरे की हालत देख के
वो सिर पे कुण्डी ठाले स जद डिग्री-डागरी फेंक के
र बेकारी का इसते बड़ा कोए और उदाहरन के बतावे
बी ए ऍम ए पास छोरे आज देश में औटो चलावे
के कर लेवां तेरा नौकरी तेरी न्यारी श्यान स
बेकारी के मन्दिर में तू ए तो भगवान स
तू ए इब आबाद करेगी, तू ए देवेगी जिस्सा
तू ए दूर करे बेकारी, तू ए देवेगी पिस्सा
अर तू स जिसके धोरे जिंदगी ठाठ होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
खदरधारी के आंगन में तू गंगा बनके बहवे स
जाणा सां तू रिस्पतपुर के सिफारिस नगर में रहवे स
अर शक्ल में जिनके बारा बजरे, बोलन की तमीज़ कोन्या
कई इसे नौकरी कर रे स जो इंसानियत के बीज कोन्या
पांच मिनट के काम में दस-दस घंटे ला दे स
बाप की जागीर समझ के कुर्सी देश का धुम्मा ठा दे स
एक त मिलरी स उन न नौकरी, ना तो दिखे दिन में तारे
बेकारा की भीड़ में वे भी पावे किते तेरे मारे
बेकारी के दर्द का उनके दिल में जद अहसास होवे
तेरे कारण जगह-जगह पे उनका भी उपहास होवे
बेचैन नौकरी कईया न तो आज पकोड़े चाट होरी स ----------र नौकरी तेरे बिना ..............
Friday, 15 July 2011
मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…
एक बान्दर एक बान्दरी से बोल्या मैं हुक्का पी आऊं । बान्दरी बोल्ली जा पिया। वह हुक्का पियण चला गया तो वहां चार पांच आदमी बैठे थे और उन्होने चिलम झाड राखी थी। बन्दर जा कर उस चिलम के ऊपर बैठ गया । चिलम में बिरहड बैठी थी वा उसकै लड गई। बन्दर तो वहां से उछलता हुआ बान्दरी के पास आया……..... .बान्दरी बोल्ली हुक्का पी आया…….?
बांदर बोल्या……हु क्का के पिया……..मे री ते नशे में देही पाटी जा सै…
चाइनीज काटडी
राकेश खूंढ़े की चाह की दूकान फेल होगी | तो उहने महम आले मेले में २०-२५ काटडी बाँध ली बेचन खातर |
जीतू मान-- आं भाई काटडी कितने की दी ?
राकेश खूंढा -- ५०० रापियाँ की |
जीतू मान -- इन्नी सस्ती क्यूकर ?
राकेश खूंढा--- चाइनीज सें |आड़े तो रिंगा के दिखा दयुन्गा अर जा घरां जा कें भोंसन्न लागी तो गारंटी ना स |
Subscribe to:
Posts (Atom)