डबलिंग हरियाणे की सबते न्यारी स
जिसने आगि बोलनी वो सबपे भारी स
चाय- चूए, लास्सी- लुस्सी दूध-दाद देखो
चूल्हा-चाल्हा,रोटी-राटी, एक आध देखो
भैंस-भूंस,गाय- गुए, डांगर-डूंगर देखो
खोर-खार, नौरा- नारा, टींगर-टुंगर देखो
माणस-मुनस, खाना- खुणा. खाया-खुई करते
बूढी-बाढ़ी, लुगाई-पताई, वांर राइ रुई धरते
छोरे-छारे, छोरी-छ्पारी, जद भाभी-भुभी बोल्ले
मां-मू ,भाई-भुई ना बोलते आंनी तोल्ले
सुट-साट, पैंट-पुन्ट लुंगी-लांगी देखो
धोती-धाती, कुरता-कारता,गूंगी-गांगी देखो
अर हरियाणवी बोल्ल्निया संस्कृति का पुजारी स....डबलिंग हरियाणे की................
रिश्ते-राष्त्या का उरे जब जिक्र-जुकर चाल्ले
सुनके दुनिया का कालजा दो हाथ हाल्ले
ताई-तुई, काकी-कुकी,दादा-दुदा देखो
दादी-दूदी, भुवा-भावा, चाची - चूची देखो
बेबे-बाबे, जीजा-जाजा, बेटा-बाटा देखो
कहावता में आके फसरया, बिरला टाटा देखो
अर देखो कहण आल्ले क्यूकर भ्यानी-भुन्नी बोल्ले
बाल्टी-बुलटी,कुवां-कावां, पाणी-पूणी बोल्ले
खेत क्यार, नहर-नाहर, गेहूं-गांहू देखो
सब हरियाणे में घूम के अच्छी दाऊ देखो
पाओगे उरे भाईचारे की खेती क्यारी स.........डबलिंग हरियाणे की................
अफसर- उफसर, डाक्टर-दुकटर नर्स-नुर्स देखो
डिग्री-डागरी, पढ़ना-पुढ्ना, कोर्स- कुर्स देखो
मास्टर-मुस्टर, मैडम-माडम, स्कूल- स्काल देखो
हर शब्द की प्याज़ ज्यू उतरती खाल देखो
देखो क्यूकर ब्याह-ब्यूह में नाचा- नुची होरी
कूद-कूद के छड़े आंगन, के छोरा के छोरी
मंत्री मुन्त्री, एसपी-उस्पी, डीसी-डासी सारे
माहरी बोली, बोल बाल के चोगरदू के छारे
रामदेव के नुक्ते--नाकते दुनिया भर में देखो
हाज़िर जवाबी के मास्टर हरेक घर में देखो
अर देखो चुटकलों की धरती मुस्कुरा री स.......डबलिंग बोली हरियाणे की ...........
आप सभी का मेरी blogs पर स्वागत है,, प्लीज़ अपनी नजरे इनायत करके जरुर बताएं की मैं दिल की बात कहने में कहाँ तक सफल हुआ हूँ..| http://bechainkigazleblogspotcom.blogspot.com/2011/09/blog-post_17.html http://bechainkesher.blogspot.com/ http://vmbechain.blogspot.com/?zx=40fa6e9f43ea7230 http://bechainartical.blogspot.com/http://www.youtube.com/my_videos?ls=public
khas log
Friday, 8 July 2011
Thursday, 7 July 2011
लो भाईओ कविता न ध्यान त पढो अर बताओ के नौजवानों के मन की बात को कहने में किस हद तक सफल हुआ हूँ बापू समझया कर
बापू समझया कर, इब मैं छोटू कोन्या रहया
भूख त ज्यादा खाया करता वो मोटू कोन्या रहया
बीस साल त ऊपर मेरी उम्र हो ली स
ध्यान त देख मैंने अपनी जिंदगी संजो ली स
तेरे पैर की जुती मेरे छोटी आवे स
बापू,, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरा सारा मुह ढाढ़ी का भरा स
पूरा आदमी लागु सु ,, के होया जै बदन छरहरा स
विश्वास कर बापू, मैं गलत संगत में कोन्या बैठता
अर इब तो,, बात-बात प भी कोन्या एठता
गौर त देख,,मैं बड़ा होग्या सूं
अपने पैरा पर खड़ा होग्या सूं
भले बुरे की मैंने सारी समझ आवे स
अर बापू, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरी चिंता करनी छोड़ दयो
अपनी देई का ध्यान धरो,
शरीर बुढा हो लिया स, ना खुद न परेशान करो
थारे नाम न बदनाम नहीं करूंगा
कदे नीची देखनी पड़े, इस्सा कोए काम नहीं करूंगा
थारे टेम अर माहरे टेम में दिन रात का फर्क स
वो टेम स्वर्ग था तो यो टेम एकदम नर्क स
फेर भी इस नर्क में मैं पूरा नहीं धसूंगा
थम घबराओ मत ,, क्याये में नहीं फसूँगा
अर बापू,,,
तू भी तो कदे जवान था
कालिज अर बाहर दोस्त की शान था
अर बापू या बात तू ए तो कह्य करे स
के, जवानी आदमी के बचपन न हरे स
तो बापू, बचपन मेरा भी हरया गया
कदम जवानी का धरया गया
इब त ए बता इसमें मेरा के कसूर स
वो बचपन ए मेरे त दूर स
अर तू मैंने फेर भी बालक कहवे स
न्यू बता,, कदे उलटी गंगा भी बहवे स
अर जवानी के दर्द त तू अनजान नहीं स
माहरे टेम में फेर भी दर्द की लिस्ट नई स
सबते ऊपर बेरोज़गारी का दर्द
फेर तान्या की आरी का दर्द
अर बापू,, दर्द महोब्बत का के कम स
जिसका होना भी अर ना होना भी गम स
आर बापू मेरी हिम्मत तो देख
मैं फेर भी जीवन लाग रहया सुं
इतने सारे दर्दा न एकला ए पीवन लाग रहया सुं
इतना सब कुछ सहके भी मेरे आंसू नहीं आवे स
आर बापू ,, त मैंने फेर भी बालक बतावे स
याद कर बापू,, जद तू रोज़ उंवारी आया करता
अर मेरा दादा तैने आती ए धमकाया करता
उन दिना तेरे के मन में आया करती
साचली बताइए, भीड़ी पड़े थी न उन दिना धरती
फेर आज क्यों मेरी गैल दबान लाग रे सो
मैं सब समझू सू, जिसे बाता के गोले दाग रे सो
थारी नजर में मैं गलत सू , तो यो घर बार छोड़ दयूंगा
कोन्या चाहिए दौलत माँ का भी प्यार छोड़ दयूंगा
थारी मेहरबानी त आज इतना बड़ा होग्या सू
खुद का तो पेट भर ए ल्यूँगा, पैरा प खड़ा होग्या सू
मैं तो चला जाऊंगा, पर मेरी माँ का जी क्यूकर लागेगा
उसका तो कालजा मेरे बिना बेचैन होके भागेगा
पर बापू थारे एक दिन समझ में आवेगी
जद या थमने दुनिया बतावेगी
अक खुशीराम छोरा तो तेरा नेक था
तू ए गलत स,, वो तो लाखां में एक था
अर भगवान ना करे बापू,, उस दिन देर हो जावे
थारी निगाह का यूं बालक, किते भीड़ में खो जावे
वक्त स इब भी सम्भल ज्या बापू,,,
बदलते होए टेम में ढल ज्या बापू
नहीं तो बात मेरे हाथा त लिकड जावेगी
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......
भूख त ज्यादा खाया करता वो मोटू कोन्या रहया
बीस साल त ऊपर मेरी उम्र हो ली स
ध्यान त देख मैंने अपनी जिंदगी संजो ली स
तेरे पैर की जुती मेरे छोटी आवे स
बापू,, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरा सारा मुह ढाढ़ी का भरा स
पूरा आदमी लागु सु ,, के होया जै बदन छरहरा स
विश्वास कर बापू, मैं गलत संगत में कोन्या बैठता
अर इब तो,, बात-बात प भी कोन्या एठता
गौर त देख,,मैं बड़ा होग्या सूं
अपने पैरा पर खड़ा होग्या सूं
भले बुरे की मैंने सारी समझ आवे स
अर बापू, तू मैंने फेर भी बालक बतावे स
मेरी चिंता करनी छोड़ दयो
अपनी देई का ध्यान धरो,
शरीर बुढा हो लिया स, ना खुद न परेशान करो
थारे नाम न बदनाम नहीं करूंगा
कदे नीची देखनी पड़े, इस्सा कोए काम नहीं करूंगा
थारे टेम अर माहरे टेम में दिन रात का फर्क स
वो टेम स्वर्ग था तो यो टेम एकदम नर्क स
फेर भी इस नर्क में मैं पूरा नहीं धसूंगा
थम घबराओ मत ,, क्याये में नहीं फसूँगा
अर बापू,,,
तू भी तो कदे जवान था
कालिज अर बाहर दोस्त की शान था
अर बापू या बात तू ए तो कह्य करे स
के, जवानी आदमी के बचपन न हरे स
तो बापू, बचपन मेरा भी हरया गया
कदम जवानी का धरया गया
इब त ए बता इसमें मेरा के कसूर स
वो बचपन ए मेरे त दूर स
अर तू मैंने फेर भी बालक कहवे स
न्यू बता,, कदे उलटी गंगा भी बहवे स
अर जवानी के दर्द त तू अनजान नहीं स
माहरे टेम में फेर भी दर्द की लिस्ट नई स
सबते ऊपर बेरोज़गारी का दर्द
फेर तान्या की आरी का दर्द
अर बापू,, दर्द महोब्बत का के कम स
जिसका होना भी अर ना होना भी गम स
आर बापू मेरी हिम्मत तो देख
मैं फेर भी जीवन लाग रहया सुं
इतने सारे दर्दा न एकला ए पीवन लाग रहया सुं
इतना सब कुछ सहके भी मेरे आंसू नहीं आवे स
आर बापू ,, त मैंने फेर भी बालक बतावे स
याद कर बापू,, जद तू रोज़ उंवारी आया करता
अर मेरा दादा तैने आती ए धमकाया करता
उन दिना तेरे के मन में आया करती
साचली बताइए, भीड़ी पड़े थी न उन दिना धरती
फेर आज क्यों मेरी गैल दबान लाग रे सो
मैं सब समझू सू, जिसे बाता के गोले दाग रे सो
थारी नजर में मैं गलत सू , तो यो घर बार छोड़ दयूंगा
कोन्या चाहिए दौलत माँ का भी प्यार छोड़ दयूंगा
थारी मेहरबानी त आज इतना बड़ा होग्या सू
खुद का तो पेट भर ए ल्यूँगा, पैरा प खड़ा होग्या सू
मैं तो चला जाऊंगा, पर मेरी माँ का जी क्यूकर लागेगा
उसका तो कालजा मेरे बिना बेचैन होके भागेगा
पर बापू थारे एक दिन समझ में आवेगी
जद या थमने दुनिया बतावेगी
अक खुशीराम छोरा तो तेरा नेक था
तू ए गलत स,, वो तो लाखां में एक था
अर भगवान ना करे बापू,, उस दिन देर हो जावे
थारी निगाह का यूं बालक, किते भीड़ में खो जावे
वक्त स इब भी सम्भल ज्या बापू,,,
बदलते होए टेम में ढल ज्या बापू
नहीं तो बात मेरे हाथा त लिकड जावेगी
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......
फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......फेर या दुनिया थमने बालक बतावेगी.......
Wednesday, 6 July 2011
लो मेरे यारो दिलदारो गुज़रे जमाने के किस्से आप सब के हिस्से मुलाकात कर ले.......
गाँधी आल्ले नोटा त यारी स मुलाकात कर ले
मेरी आज तो जेब भारी स मुलाकात कर ले
इडली, डोसे, गर्म समोसे, बेशक ठंडे पी लिए
लूटन-पीटन की तैयारी स मुलाकात कर ले
प्राइवेट काम करूं था तो तेरी सेवा कम होवे थी
इबके नौकरी सरकारी स मुलाकात कर ले
जिस टेम त आये स मेरे हाथा में दो पैसे
या ए बात सता री स मुलाकात कर ले
तू पिछली बार ख़ाली पर्स त बिल देना चाहवे थी
तेरी वा ए अदा भा री स मुलाकात कर ले
बाद में तो दो मिनट का भी ना टेम देवेगा बेचैन
जद तक बहू जा री स मुलाकात कर ले ..............मेरी आज तो जेब भारी स ......................
लो भाई ओ आज की दारुशाला से दो पैग आपके लिए
सबते पहल्या जिसने पी उसने मेरी राम राम
दारू की बोतल जिसने ली उसने मेरी राम राम
दारू जिसने पहल्या बनाई वो मानस नहीं भगवान था
दुःख की दवा बनावन आल्ला क्यूकर कहू इन्सान था
२
जुग- जुग जीवे काडनिया जुग जुग जीव ठेकेदार
माटी का जिसने प्याला बनाया जुग जुग जीवे वो कुम्हार
उन कीड़ा का भी हो भला जो बार बार दारू चाहवे स
अर उनके पैरा में प्रणाम जो बिना पानी पी जावे स
Tuesday, 5 July 2011
नौजवान भाई ओ के लिए पेश है उनके मन की बात
देके हजार रपिये किराया जोश में रह्ल्यांगे
उसके दिल में ना रहे तो पडोस में रह्ल्यांगे
मिल्या करेगी निगाह फेर रोज़ आपस में
बात ना होवे ना सही खोमोश में रह्ल्यांगे
लिख के रोज़ चिच्ठी उसके घर न फेकांगे
व जवाब नहीं देवेगी तो रोस में रह्ल्यांगे
होज्यागी रिश्तेदारी फेर गली के छोरया त
थारा जीजा लागु सूं इस धोंस में रह्ल्यांगे
मैं फस्ग्या जिस दिन उसके लठधारी भाईया क
सच्चा प्यार करा सां बदनाम नहीं करांगे
जित चाहवे ब्याह कर लेगी हम लोस में रह्ल्यांगे
वा साबत डोसा खागी तो के जी लिकडग्या माहरा
वा राज़ी रहियो हम तो सोस में रह्ल्यांगे
घर के सारे सोढ़- सोढ़ीये दे देगा बेचैन उसने
जाड़े की भरी रात में भी ओंस में रह्ल्यांगे
उसके दिल में ना रहे तो पडोस में रह्ल्यांगे
मिल्या करेगी निगाह फेर रोज़ आपस में
बात ना होवे ना सही खोमोश में रह्ल्यांगे
लिख के रोज़ चिच्ठी उसके घर न फेकांगे
व जवाब नहीं देवेगी तो रोस में रह्ल्यांगे
होज्यागी रिश्तेदारी फेर गली के छोरया त
थारा जीजा लागु सूं इस धोंस में रह्ल्यांगे
मैं फस्ग्या जिस दिन उसके लठधारी भाईया क
सच्चा प्यार करा सां बदनाम नहीं करांगे
जित चाहवे ब्याह कर लेगी हम लोस में रह्ल्यांगे
वा साबत डोसा खागी तो के जी लिकडग्या माहरा
वा राज़ी रहियो हम तो सोस में रह्ल्यांगे
घर के सारे सोढ़- सोढ़ीये दे देगा बेचैन उसने
जाड़े की भरी रात में भी ओंस में रह्ल्यांगे
Monday, 4 July 2011
लो भाई ओ संडे के नाम के आज के मेरी दारुशाला से दो पैग
१
दारू पीवण आल्या न या कदे नहीं बदनाम करी
जिसने पैग लगाये नहीं, उसने बुराई आम करी
हार जीत दोनु सुरता में दारू साथ निभावे स
फेर दुनिया आल्ले ठेके की क्या त चुगली खावे स
२
चोबीस घंटे ख़ुशी रहवे स दारू के ठेके में भाई ओ
जिसने मौज मस्ती चाहिए आके बोतल ले जाइयो
या स्वर्ग लोक की शहजादी दुःख दर्दा त दूर रहवे
जो भी एक ब चख लेवे इसने दारू की पुडिया कहवे
भाई ओ हरियाणे में आदमी के नाम का कसूता मामला स,,जो नाम स उसके अर्थ त कोसो दूर पावेगा,,, एक भाई रात के टेम गली के कोने पर खड़ा था मैं उसते पूछ बैठा के नाम स तेरा,, बोल्या -शेर सिंह, मैं बोल्या--फेर उरे क्यों खड़ा स,, सुनके बोल्या- आगे कुते लड़न लाग रे स ......न्यू इ आदमी अर औरत के पुराने नाम न लेके एक प्रयोग करया स,,पहल्या आल्ले नाम,,,अपने विचार जरुर बताई ओ ,,,
ज्ञानी सूबे रामफल सवाई होया करते
पहल्या आल्ले नाम भी हाई होया करते
और हर नाम क पीछे एक कारण होया करता
गाम राम के खातर जो उदाहरन होया करता
धोरे जिसके धेला कोन्या,, नाम किरोड़ी पाता
किताब सिंह भी उन दिना कदे स्कूल नहीं जाता
बड़े भाई क लट्ठ मरता.. लछमन सिंह आवारा
शक्ल में जिसके बारा बजरे, कहते उसने प्यारा
हाथी बरगी देई ले रह्य ,, नाम माडा राम
सही राम के पाया करते सदा ए गलत काम
जिंदगी भर दुःख पाए सुखिया अर खुसीराम
कुते त डर जावे था, शेरा जिसका नाम
अर दोनु हाथा दान करे, ताऊ मांगे राम
आये गये का मान करे,, झगडू जिसका नाम
सच नाम के विपरीत पह्ल्ड़े लोग लुगाई होया करते.....ज्ञानी सूबे रामफल .............
बात कहके मुकरा नहीं कदे भी बदलू राम
गोबर में त दाणे चुग ले ये धर्मे के काम
भुंडू मल भी नहाया धोया बचपन त ए रहया
चाँद राम न गर्मी का प्रकोप खूब सह्या
पूर्ण सिंह का कोये काम भी कदे न पूरा पाया
दान सिंह न सारी उम्र मांग-मांग के खाया
बात- बात पे गुस्सा होज्या मौसा ठंडी राम
नकली राम के पाया करते सदा ए असली काम
राम नाम कदे लिया नहीं अर नाम बजरंग लाल
भोला राम तारया करदा सदा बाल की खाल
गाम त न्यारा धन ले रह्य अर नाम फकीर चंद
सुंदर मल न अपने घर में राख्या सदा ए गंद
भरतु, गंगू अर इसे ए गुसाई होया करते ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
बात लुगाइया की चले तो वा भी सुन ल्यो थम
नाम काम के मामले में ये भी नहीं थी कम
केल्ला, अंगूरी, संतरा न कदे फ्रूट नहीं खाए
मिसरी, मेवा, इमरती न सदा ए चने चबाये
तवे त भी काली पाती भूरी अर सुनहरी
चलती देवी पड़ोसिया क दस-दस घंटे ठहरी
कदे खजानी दादी न भी पंजी तक ना जोड़ी
गोबर थापन में माहिर थी बसंती अर गिन्दोड़ी
अर छत पे त उतरा ना जा, नाम चाँद तारी
मौसी नान्ही देवी न भी देई राखी भारी
मरिया देवी सौ साल त ऊपर जिया करती
ताई शरबती शरबत नहीं लास्सी पिया करती
बर्फी, पतासो और इसे ए नाम मलाई होया करते े ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
जिंदगी घर रही क्वारी गाम की भुवा बन्नो
पंजी- पंजी न तरसी सदा ए मौसी धन्नो
और मन्दिर में कदे गई माहरी काकी रामप्यारी
सुख देई न पाली राखी सदा ए नै बीमारी
चौखट त भी ऊंची फेर भी नाम पता छोटी
छिपकली सी होती जिसने सारे कहते मोटी
चम्पा और चमेली न भी कदे बाग़ नहीं देखे
ताई शांति जुत बजान के लिया करती ठेके
कदे खाण त ना छिकी धापा जिसका नाम
दयावंती पिटया करती लगभग सारा गाम
मीरा अर कृष्णा न भी कदे भजन नहीं गाये
रौशनी न दिन अपने अँधेरे में ए बिताये
सच नाम के विपरीत पह्ल्ड़े लोग-लुगाई होया करते,,,,,,,,,े ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
पहल्या आल्ले नाम भी हाई होया करते
और हर नाम क पीछे एक कारण होया करता
गाम राम के खातर जो उदाहरन होया करता
धोरे जिसके धेला कोन्या,, नाम किरोड़ी पाता
किताब सिंह भी उन दिना कदे स्कूल नहीं जाता
बड़े भाई क लट्ठ मरता.. लछमन सिंह आवारा
शक्ल में जिसके बारा बजरे, कहते उसने प्यारा
हाथी बरगी देई ले रह्य ,, नाम माडा राम
सही राम के पाया करते सदा ए गलत काम
जिंदगी भर दुःख पाए सुखिया अर खुसीराम
कुते त डर जावे था, शेरा जिसका नाम
अर दोनु हाथा दान करे, ताऊ मांगे राम
आये गये का मान करे,, झगडू जिसका नाम
सच नाम के विपरीत पह्ल्ड़े लोग लुगाई होया करते.....ज्ञानी सूबे रामफल .............
बात कहके मुकरा नहीं कदे भी बदलू राम
गोबर में त दाणे चुग ले ये धर्मे के काम
भुंडू मल भी नहाया धोया बचपन त ए रहया
चाँद राम न गर्मी का प्रकोप खूब सह्या
पूर्ण सिंह का कोये काम भी कदे न पूरा पाया
दान सिंह न सारी उम्र मांग-मांग के खाया
बात- बात पे गुस्सा होज्या मौसा ठंडी राम
नकली राम के पाया करते सदा ए असली काम
राम नाम कदे लिया नहीं अर नाम बजरंग लाल
भोला राम तारया करदा सदा बाल की खाल
गाम त न्यारा धन ले रह्य अर नाम फकीर चंद
सुंदर मल न अपने घर में राख्या सदा ए गंद
भरतु, गंगू अर इसे ए गुसाई होया करते ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
बात लुगाइया की चले तो वा भी सुन ल्यो थम
नाम काम के मामले में ये भी नहीं थी कम
केल्ला, अंगूरी, संतरा न कदे फ्रूट नहीं खाए
मिसरी, मेवा, इमरती न सदा ए चने चबाये
तवे त भी काली पाती भूरी अर सुनहरी
चलती देवी पड़ोसिया क दस-दस घंटे ठहरी
कदे खजानी दादी न भी पंजी तक ना जोड़ी
गोबर थापन में माहिर थी बसंती अर गिन्दोड़ी
अर छत पे त उतरा ना जा, नाम चाँद तारी
मौसी नान्ही देवी न भी देई राखी भारी
मरिया देवी सौ साल त ऊपर जिया करती
ताई शरबती शरबत नहीं लास्सी पिया करती
बर्फी, पतासो और इसे ए नाम मलाई होया करते े ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
जिंदगी घर रही क्वारी गाम की भुवा बन्नो
पंजी- पंजी न तरसी सदा ए मौसी धन्नो
और मन्दिर में कदे गई माहरी काकी रामप्यारी
सुख देई न पाली राखी सदा ए नै बीमारी
चौखट त भी ऊंची फेर भी नाम पता छोटी
छिपकली सी होती जिसने सारे कहते मोटी
चम्पा और चमेली न भी कदे बाग़ नहीं देखे
ताई शांति जुत बजान के लिया करती ठेके
कदे खाण त ना छिकी धापा जिसका नाम
दयावंती पिटया करती लगभग सारा गाम
मीरा अर कृष्णा न भी कदे भजन नहीं गाये
रौशनी न दिन अपने अँधेरे में ए बिताये
सच नाम के विपरीत पह्ल्ड़े लोग-लुगाई होया करते,,,,,,,,,े ,,,, पहल्या आल्ले नाम भी ................
Saturday, 2 July 2011
लो भाई ओ हरियाणवी आदमी का वो अंदाज़ देखो जो उसकी पहचान स,,, हम तो काच्चे कट रे सां
जिंदगी की रेल न चैन खीच के डाट रे सां
बेशक लोग किम्मे कहो, हम तो काच्चे कट रे सां
किसने बुरा मान्य स घरवाली की डाट का
वा बेशक शेरू मार देवे काढ के न खाट का
कालम वफादारी के सारे के सारे भर दयां सां
महीने आल्ले दिन तनखा हाथ पे ल्याके धर दयां सां
देर सेवर सूट उसके प्रेस भी हम कर दयां सां
हाँ ,हम सब्जी भी खरीद के ल्यावा सां
बालका न भी खिलावां सां, झूठी हाँ म हाँ मिलावा सां
छुट्टी आल्ले दिन उसका रसोई म हाथ बटावा सां
क्योकि भाई ओ हम तो जीना चाहवां सां
पर, रोटी पोवण त हम कद नाट रे सां .........लोग किम्मे कहो...............
फोर्थ क्लास डिपार्टमेंट न सेवा खातर बनाई स
पर चपड़ासी के दर्द त, किसने आँख मिलाई स
फेर भी अपने साहब का पूरा हुक्म बजावा सां
रोज़ क्लरका न अपनी जेब त बीडी प्यावा सां
बालका न स्कुल में भी छोड़न जावा सां
रोज़ सिलेंडर भी भरवा के ल्यावा सां
इतनी सेवा करके भी फेर भी हम बदनाम सां
लोग कहवे स रिस्पत का, हम पहला मुकाम सां
रोज़ सवेरे ऑफिस में हम ए झाड़ू मारां सां
फाइल गेल्या फाइल आल्ले न, हम ए पार उतारा सां
पर, फिलहाल तो हम दफ्तर में ताश बाँट रे सां .........लोग किम्मे कहो................
हम प्रधानी करनिये तूफ़ान उठा देवां
एंडी त एंडी आदमी न एक बी धमका देवां
आच्छी दाऊ ना जाने, गाम राम माहरे टोरे न
बेशक हो झूटमूठ का, लगवा दयां हम छोरे न
सारे डिपार्टमेंट का रवेया हमने चाख्या स
हाँ, समाजसेवा करण का ठेका ले राख्या स
फेर भी , लोग हमने खाऊ पीर कहवे स
मुह प कोन्या, पीठ पीछे फकीर कहवे स
पर, लोगा की बात का के बुरा माना
हम पंजी ना राखा, अर जाने सारा पाना
बस राजनीती में थोडा सा उपर जाना चाहवां सां
योहे कारण स, कुरते में डेली नील प्यावां सां
बिना नौकरी के भी देखो हम रंग छांट रे सां ...........लोग किम्मे कहो.................
बेशक लोग किम्मे कहो, हम तो काच्चे कट रे सां
किसने बुरा मान्य स घरवाली की डाट का
वा बेशक शेरू मार देवे काढ के न खाट का
कालम वफादारी के सारे के सारे भर दयां सां
महीने आल्ले दिन तनखा हाथ पे ल्याके धर दयां सां
देर सेवर सूट उसके प्रेस भी हम कर दयां सां
हाँ ,हम सब्जी भी खरीद के ल्यावा सां
बालका न भी खिलावां सां, झूठी हाँ म हाँ मिलावा सां
छुट्टी आल्ले दिन उसका रसोई म हाथ बटावा सां
क्योकि भाई ओ हम तो जीना चाहवां सां
पर, रोटी पोवण त हम कद नाट रे सां .........लोग किम्मे कहो...............
फोर्थ क्लास डिपार्टमेंट न सेवा खातर बनाई स
पर चपड़ासी के दर्द त, किसने आँख मिलाई स
फेर भी अपने साहब का पूरा हुक्म बजावा सां
रोज़ क्लरका न अपनी जेब त बीडी प्यावा सां
बालका न स्कुल में भी छोड़न जावा सां
रोज़ सिलेंडर भी भरवा के ल्यावा सां
इतनी सेवा करके भी फेर भी हम बदनाम सां
लोग कहवे स रिस्पत का, हम पहला मुकाम सां
रोज़ सवेरे ऑफिस में हम ए झाड़ू मारां सां
फाइल गेल्या फाइल आल्ले न, हम ए पार उतारा सां
पर, फिलहाल तो हम दफ्तर में ताश बाँट रे सां .........लोग किम्मे कहो................
हम प्रधानी करनिये तूफ़ान उठा देवां
एंडी त एंडी आदमी न एक बी धमका देवां
आच्छी दाऊ ना जाने, गाम राम माहरे टोरे न
बेशक हो झूटमूठ का, लगवा दयां हम छोरे न
सारे डिपार्टमेंट का रवेया हमने चाख्या स
हाँ, समाजसेवा करण का ठेका ले राख्या स
फेर भी , लोग हमने खाऊ पीर कहवे स
मुह प कोन्या, पीठ पीछे फकीर कहवे स
पर, लोगा की बात का के बुरा माना
हम पंजी ना राखा, अर जाने सारा पाना
बस राजनीती में थोडा सा उपर जाना चाहवां सां
योहे कारण स, कुरते में डेली नील प्यावां सां
बिना नौकरी के भी देखो हम रंग छांट रे सां ...........लोग किम्मे कहो.................
लो जी शनिवार के नाम मेरी दारुशाला के ये दो जाम
१
बड़े-बड़े खानदान डुबो दे बेशक ठेके की गंगा
बिन पानी इज्जत धो दे बेशक ठेके की गंगा
धन दौलत राजपाट का बेशक मलियामेट हो जावे
पर पीवनिया अपना नियम जीते जी रोज़ निभावे
२
कदे त बुरा कहलाता आया, यो ज़ालिम प्याला दारू का
पर दारू पीवण त ए मिटेगा,एक दिन छाला दारू का
ख़ुशी में भी जाम छलके और गमी में भी देवे साथ
बोतल जिसकी हमसफर स मस्ती उसकी भर ले बांथ
Friday, 1 July 2011
माहरी बोली
जिसमे स दम माहरी बोली सीख के दिखा दयो
अर सीख्या पाछे हरियाणवी त छीक क दिखा दयो
इस बोली के रंग कई स, कहन के इसके ढंग कई स
कम्बल के बाल न लफूसडा कह दयां,
जुत्या न हम खोसडा कह दयां
नुक्सान होवे तो याता कह दयां
शादी-शुदा न ब्याहता कह दयां
सास न हम साहसु कह दयां
आच्छे मानस न धांसू कह दयां
अर ख़त न कह दयां, चिठ्ठी- चाठी,
धून का पक्का कुहावे ठाठी
माहरी बोली माहरी स, सब बोलिया त न्यारी स
सबका तोड़ मिल जावेगा,, सौ का जोड़ मिल जावेगा
पर माहरी बोली धाकड़ स, या तो सिक्या पापड़ स
कोए इस पापड़ सा सीक के दिखा दयो..............जिसमे स दम...............
केले को हम केल्ला कह दयां,
मेले को हम मेल्ला कह दयां
छोरी न हम टिंगरी कह दयां
छेड़खानी न टिगली कह दयां
किते काम बिगड़े तो मठ मर ज्यां स
माहरी बोली त लठ गढ़ ज्या स
पैसे न हम पिस्सा कह दयां
आनंद न हम जीस्सा कह दयां
अर कह दयां बीडी-बाड़ी हम
दोस्त न कह दयां याडी हम
माहरी बोली माहरी स, सब बोलिया त न्यारी स
सबके बस की ना स या
कोरी धसकी ना स या
इसका व्याकरण टेढ़ा स
इसने समझनिया ढेठा स
इसके सारे बोल कोए लिख के दिखा दयो........जिसमे स दम........
जो ना कतरावे डाकी कह दयां
खिड़की न हम ताकी कह दयां
टेढ़े न हम झोल कह दयां
थप्पड़ न हम धोल कह दयां
कालिये न हम भुंडा कह दयां
गंजे न हम रुंडा कह दयां
ह्म्भे माहरी हाँ होवे स
अह माहरी ना होवे स
महरा कहना माहरा स
कडवा पानी खारा स
माहरी धोती क भी लांगड होवे
लठ लेरे तो बांगड़ होवे
सबके बसकी ना स या
कोरी धसकी ना स या
कोए इसके आगे टिक के दिखा दयो......जिसमे स दम
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