khas log

Wednesday, 4 July 2012

देख लिए मेरे घर के तू एक दिन चक्कर काटेगी



जा कौण सी बिन तेरे ,माहरी भैंस दूध नै नाटेगी
तू पीछा छोड़ देवेगी तो माँ मेरी प्रसाद बाटेंगी

मेरे बरगा शरीफ गाबरू तैंने कही भी ना मिलेगा
देख लिए मेरे घर के तू एक दिन चक्कर काटेगी

तैने नही उस घड़ी नै रोऊ सूं, जद इकरार होया
ना मालूम था छाती मेरी न्यू बीच में तै पाटेगी

बेबसी की धरती पे एक दिन पानी फूटके निकलेगा
बता कितने दिन तू आंसुआ नै निकलन तै डाटेगी

सबने बेचैन ना लगाइए इस रंग बदलती दुनिया में
जा मैं देखूँगा किसकी धडकन तेरे तलवे चाटेगी

Sunday, 20 May 2012

तेरे पै एक हाथ तै ताली बजाण दोष सै

मैं अकेला बता क्यूकर कसूरवार होया
ऐसी तैसी दोनों की हुई तो प्यार होया

तेरे ना यकीन आवे तो के ज्यान दे दूं
तेरी जुदाई में मेरे कितणा बुखार होया

वो नींदा में भी कुछ कुछ बड़बड़ावे सै
चालू अर झूठा जिसका दिलदार होया

मैंने तो सपने में भी हवालात दिखे सै
तेरा बाप जिस दिन तै थानेदार होया

ब्याह के बाद भी हाथ पैर चलाणे पड़ेंगे
कोर्ट मैरिज होगी तो ना सोच पार होया

कोए देख ना ले मैंने आंख्या में बस्या
शायद तू आजकल न्यू चश्मेदार होया

तेरे पै एक हाथ तै ताली बजाण दोष सै
जद ए बेचैन तू बेरुखी का शिकार होया

Saturday, 28 April 2012

जब म्हारी छोरी ऐ इसकी शक्ल देख कै राजी कोन्या तो म्हारा के साला लागे सै


एक बै एक बटेऊ ससुराड़ चला गया . उडे चौक में उसकी बहु का
दादा लोटा था खाट पै , उसकी बहु भी उडे काम करती हांडे थी /
उसके भीतर बड़ते ही उसकी बहु ने शरमा कै मुह डक लिया /
यो देख कै उसके दादा ने भी चादर तै आपना मुह डक लिया .
एक पड़ोसी देखे था छत पर तै यो माज़रा . वो पड़ोसी बोल्या --
ताऊ बेबे नै तै ठीक पल्ला करा सै , पर तने क्यों यो मुह डक लिया /
बुड्डा बोल्या -- अरे जब म्हारी छोरी ऐ इसकी शक्ल देख कै राजी
कोन्या तो म्हारा के साला लागे सै

जे थाम दोनुवा में तें किसे ने या पूछ ली के या मन्ने जाने है तो में थारे गोली मरवा दूँगा


क बार एक मुक्कदमे में ताई गवाह बना दी ! ताई जा के खड़ी होई अर् दोनू वकील भी ताई के गाम के ऐ थे !
वकील " ताई तू मन्ने जाने है ?
ताई" हाँ तू रामफूल का है ना तेरा बाबु घाना सूधा आदमी था पर तू कत्ति निक्कमा एक नम्बर का झूठा . झूठ बोल बोल के तू लोग ने ठगे है नरे झूठे गवाह बना के तू केस जीते है . तेरे तें तो सारे लोग परेशान हैं तेरी लुगाई भी परेशान हो के तन्ने छोड़ के चली गयी !
वकील चुप फेर पुछया " तू इसने जाने है ?
ताई बोली " हाँ यो सूबे का है इसके बाबु ने नरे रपिये खर्च करके यो पढाया अर् इसने कख नही सिखया सारी उमर चोरिया पचे हंडे गया इसका चक्कर तेरी बहु गेल भी था ! आज ताहि इसने एक भी मुक्कादमा नही जित्या है!
जनता हासन लग गयी जज बोल्या "आर्डर आर्डर "
अर् दोनू वकील बुलाये और कहन लगया " जे थाम दोनुवा में तें किसे ने या पूछ ली के या मन्ने जाने है तो में थारे गोली मरवा दूँगा

Monday, 23 April 2012

म्हारे घरां तो या कदे ओल्हा नहीं काद्या करै थी !

एक लड़की ने जब शादी के बाद ससुराल में घूघट निकाला तो उसके भाई से जीजा ने गीला किया कि तुम्हारी बहन तो बड़ी देसी है—घूंघट करती है. भोला भाई बोला—जीजा या तो बीमारी इसकै थारे घरां आ कै लगी सै, म्हारे घरां तो या कदे ओल्हा नहीं काद्या करै थी !

यैं इतनी बड्डी-बड्डी मूछ किस दिन काम अवैंगी. डबो-डबो कै चूसा दे !

एक बूढ़े के पास अपने दूध-मुहें बच्चे को छोड़ कर एक बहू खेत चली गयी. बच्चा रोने लगा. एक बोला—इसनै किमे चा-चूह प्यादे. बूढा बोला—न्यूँ क्युकर? एक बोला—यैं इतनी बड्डी-बड्डी मूछ किस दिन काम अवैंगी. डबो-डबो कै चूसा दे !

तीसरा आप्पे कर ले

एक गुरु और उसका चेला कुटिया में सोने की तय्यारी कर रहे थे. गुरु बोला—चेले झांकी बंद करदे, हवा आ रही सै. चेला बोला—गुरु जी चादर ओढ़ ले हवा नहीं लागैगी. गुरु बोला—अच्छा दीवा बुझा दे. चेला बोला—गुरु जी आंख मीच ले तेरे लेखै अँधेरा होगया. झल्लाया गुरु बोला—अच्छा तो कुवाड भेड़ ले. चेला बोला—देख गुरु जी दो काम मन्नै कर दिये, तीसरा आप्पे कर ले 

चढाई क्यां खातर थी ?



एक मंदिर के आगे घंटियाँ बज रही थी. फूल चढ़ाये जा रहे थे. धूप-बत्ती की जा रही थी. भजन कीर्तन चल रहा था. एक चौधरी पास से गुज़रा तो बोला—रै यूं के खाडा कर राख्या सै? जवाब मिला—आरती तारण लाघ रे सै. चौधरी लठ ठोक के चलते हुए बोला—तारणी ऐ थी तो चढाई क्यां खातर थी .

मैं तेरा ऐ तो मरद सूं चोर का तो नहीं .

एक घर में चोर घुस ग्या. बर्तन खटकने का शोर हुआ. बीवी बोली—उठ ले घर मैं चोर बड रह्या सै. शौहर लेटा रहा. फिर खटपट हुई. बीवी ने फिर कहा-- हाए उठ नै देख नै. शौहर बोला—मैं क्यूं उठूँ , तू उठ ले. बीवी बोली—हाए तू मर्द सै. शौहर बोला—मैं तेरा ऐ तो मरद सूं चोर का तो नहीं .

ठीक सै तो मैं भी तम्नै गिलास मैं थूके बिना पांणी प्याय करूँगा.

एक चौधरी को चपरासी की नौकरी मिल गयी. उसके दफ्तर वाले उसको देहाती समझ के अच्छा सलूक नहीं करते थे, एक दिन उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया और उसको कहने लगे—सुन भाई चौधरी हम आगे तै तेरे साथ अच्छा वर्तावा करैंगे. चौधरी बोला—ठीक सै तो मैं भी तम्नै गिलास मैं थूके बिना पांणी प्याय करूँगा.