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Monday, 1 August 2011

सदबुधी दे उननै जिनके, ओछे रिश्तेदार होवे


जल्दी त कोथली पहुंचा दे भाई, तीज आगी स
दे-देके ताने नणद अर सास्सू जी न खागी स

जब त लाग्या सामण तब त, योए दुखड़ा सह री सूं
के आवेगा,, के कुछ होगा, अपने आप त कह री सूं
ब्योंत स माडा पीहर का मैं इस रास्से में बह री सूं
फेर त्यौहार के नाम पे मेरी शामत लागी स.......दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

माँ और बाप रहे कोन्या मेरे  दो भाई स वे कमज़ोर
बड़ी मुश्किल त पाल रे टाबर बिना नौकरी डांगर ढौर
देवेंगे वो बेबे न कुछ बता क्यूकर मार देवू मैं बोर
मेरे भाईया खातर हाय गरीबी जाल बिछागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

मेरी देवरानी और जिठानी ज्यादा मुह इतरावे स
जिस  कारण उनके घर त भर-भर झोले आवे स
मेरी हालत पे कोए ना हाय र तरस खावे स
या किस्मत की काली परछाई मेरे उप्पर छागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

तीज मुबारक हो सारया न, सबका बेडा पार होवे
याहे दुआ देवे गरीबनी ना किसे की भी हार होवे
सदबुधी दे उननै जिनके, ओछे रिश्तेदार होवे
बात पते सबने बेचैन गरीबी बतागी स ....दे-देके ताने नणद अर सास्सू.............

Wednesday, 27 July 2011

लागे स हालात पे लिखणा पड़ेगा


दिन अर रात पे लिखणा पड़ेगा
लागे स हालात पे लिखणा पड़ेगा
नश्तर सी चुभे स, कडवी बोली
अपन्या के वाक्यात पे लिखणा पड़ेगा
लिकड़ आवे शायद राह कोए न कोए
उस दिन की मुलाकात पे लिखणा पड़ेगा
बदले स बैरी गिरगिट की ज्यूँ रंग
रिश्त्या की करामात पे लिखणा पड़ेगा
ले जावे स बहाके बेचैन जिंदगी न
आंसुआ की बरसात पे लिखणा पड़ेगा

Tuesday, 26 July 2011

क्वांरे भाई ओ की और से शादी के मामले में एक हरियाणवी शर्त जो मेरे बाबु की धोती धोवे ,, उसते ब्याह करूंगा


जो स्यानी काटती ना रोवे,, उसते ब्याह करूंगा
जो बाजरे की रोटी पावे,, उसते ब्याह करूंगा
जींस पहरन आल्ली त, मैंने सख्त अलर्जी स
जो सूट पहर के दिल न मोहवे,, उसते ब्याह करूंगा
वा धोवण में तो धो देगी, मेरे कपड़े फेर भी भाईओ
जो मेरे बाबु की धोती धोवे ,, उसते ब्याह करूंगा
सर पे चढ्गी तो थप्पड़ मार-मार उतारूंगा
जो पिटा-छित्या ना रोवे ,, उसते ब्याह करूंगा
घरवाली की डांट में भी प्यार छुप्या बेचैन
जो सही बात पे गुस्सा होवे ,, उसते ब्याह करूंगा

अहसास ने माना तो बन गया रिश्ता

जवानी का समन्दर पार नहीं होता
आदमी को जब तक प्यार नहीं होता
पूछ लीजिये बेशक किसी से जाकर
जिंदगी का कोई एतबार नहीं होता
इश्क नहीं इसको हम बहम कहेंगे
रु-ब-रु जब तक इकरार नही होता
अहसास ने माना तो बन गया रिश्ता
रिश्तो का वरना कोई आकार नहीं होता
रिन्द जिसे कहते हो रोजाना पीता है
हफ्तों में पीने वाला मयख्वार नही होता
इश्क से परहेज़ करने वालो याद रखना
बिना दिल दिए खुदा का दीदार नही होता
बात दिल की छुपानी जायज़ है बेचैन
पर्दा करने से इंसां शर्मसार नही होता



Monday, 25 July 2011

मरके विरासत में के देके जाओगे

नौजवानों सोच लो थम अपने टाबरा न
मरके विरासत में के देके जाओगे
झूठ चोरी जारी और फरेब की चासनी में
कौन से संस्कार भे के जाओगे
दे रहे हो जिस तरह  धोखा माँ बाप को
खुद संग यही क्या इतिहास दोहराओगे
वक्त है अभी भी सम्भल जाओ दोस्तों
वरना पीढियों का जुगाड़ क्र जाओगे

साँझ ढलते ही ख्वाब आने नहीं

अंगूर की बेटी के जो दीवाने नहीं
वो लोग महफ़िल में बुलाने नहीं
कल टूटते है तो आज ही टूट जाएँ
दोस्तों हमें झूठे रिश्ते निभाने नहीं
बिना पानी के जाम पीना पड़ेगा
यहाँ पर चलेंगे कोई बहाने नहीं
आने है जिसके आधी रात आयेगे
साँझ ढलते ही ख्वाब आने नहीं
अभी कल की ही तो बात है दोस्त
जख्म महोब्बत के पुराने नहीं
कोई तो बताये बेचैन जिसके
नसीब में इश्क के फसाने नहीं

Sunday, 24 July 2011

सोच रह्य सूं भगवान् सोवे स अक जागे स

भाईचारा दोस्तों, ना बेरा कित खुग्या,
तीज अर त्यौहार इब कती फीके लागे स
रिश्तया की शुद्धता इसी होरी स जणु,
दूध खातर भैंस क रोज़ टिके लागे स
हाय तौबा माचगी अर बढ्गी स तेरा मेरी
सोच रह्य सूं भगवान् सोवे स अक जागे स
धन धान्ये नौकरी अर सारा स जुगाड़ जिनके
वो भी आज बीपीएल बणन न भागे स

Saturday, 23 July 2011

सच्ची बात कहू तो मेरे दोस्तों

दोस्तों मुझे होश नहीं अब क्या सुनाऊ
कोई अफ़सोस नहीं अब क्या सुनाऊ
वो मेरा आदेश भला क्यों मानेगी
मैं उसका बॉस नही अब क्या सुनाऊ
सच्ची बात कहू तो मेरे दोस्तों
मन में जोश नहीं अब क्या सुनाऊ
ताकत की मुझसे उम्मीद रखने वालो
रिश्ते में सफेदपोश नहीं अब क्या सुनाऊ
मैं तो बेचैन हूँ सदा चैन को तरसता हूँ
इसमें मेरा दोष नही अब क्या सुनाऊ

मैं उसका बॉस नही अब क्या सुनाऊ

दोस्तों मुझे होश नहीं अब क्या सुनाऊ
कोई अफ़सोस नहीं अब क्या सुनाऊ
वो मेरा आदेश भला क्यों मानेगी
मैं उसका बॉस नही अब क्या सुनाऊ
सच्ची बात कहू तो मेरे दोस्तों
मन में जोश नहीं अब क्या सुनाऊ
ताकत की मुझसे उम्मीद रखने वालो
रिश्ते में सफेदपोश नहीं अब क्या सुनाऊ
मैं तो बेचैन हूँ सदा चैन को तरसता हूँ
इसमें मेरा दोष नही अब क्या सुनाऊ

पीकर शराब आज एक गजल लिखी है

पीकर शराब आज एक गजल लिखी है
मैंने खराब आज एक गजल लिखी है
जाने क्या गुजरेगी बागवां पर यारो
तोड़, गुलाब आज एक गजल लिखी है
आसमा के चाँद को रखकर के आँखों में
जमी के, महताब आज एक गजल लिखी है
गर बुरा न मानो तो तुमको लेकर मैंने
मेरे जनाब आज एक गजल लिखी है
वो बेचैन को कभी तो चैन देगी ही
लेकर ख्वाब आज एक गजल लिखी है